-भाग्य से सौभाग्य की और चातुर्मास में मासक्षमण की झडी-

हमारा धर्म भाव प्रधान -श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा
मासक्षमण तपस्वी जाली गादिया का अभिनंदन

रतलाम 07 अक्टूबर। मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय की निश्रा में चल रहे भाग्य से सौभाग्य की और चातुर्मास में मासक्षमण की झडी लगी हुई है। बुधवार को जाली गादिया ने मासक्षमण पूर्ण किया। उनका श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट चातुर्मास समिति की और से अन्य तपस्वियों ने अभिनंदन किया गया।
मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में धर्मसभा के दौरान प्रतिदिन मासक्षमण तपस्वियों के बहुमान हो रहे है। महासती श्री चंद्रयशाजी मसा के 61 उपवास की तप पूर्ति पर उन्हें तपमेरू का अलंकरण दिया गया। उसके बाद दूसरे दिन मासक्षमण तपस्वी मोनिका-लोकेश मेहता और तीसरे दिन अदिति-हेमन्त गंग का बहुमान हुआ। बुधवार को जाली-राजेन्द्र कुमार गादिया का अन्य तपस्वियों ने अभिनंदन किया।
इससे पूर्व प्रवर्तकश्री ने धर्मसभा में कहा कि दान, शील और तप आदि सभी भाव से होते है। इसलिए हमारे धर्म को भाव प्रधान कहा गया है। भाव यदि शुद्ध और मजबूत होते है, तो उसका फल हमे अवश्य मिलता है। वर्तमान में जितने भी तपस्वी अपनी कठोर तप आराधना कर रहे है, वे भाव से ही कर रहे है। भाव नहीं होता, वे इतना कठोर तप नहीं कर पाते। भाव ही है, जिनसे भक्त भगवान को पा लेता है।
प्रवर्तकश्री ने तपस्वी के परिवारजनांे की प्रशंसा की। इससे पूर्व तपस्वी जाली गादिया के परिजनों ने भी विचार व्यक्त किए। धर्मसभा को आरंभ में प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने संबोधित किया। धर्मसभा का संचालन रखब चत्तर ने किया। इस दौरान सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा, महासती श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे। धर्मसभा में श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।

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