
रतलाम। आराधना भवन जैन संघ के तत्वाधान में परम पूज्य मुनिराज गणिवर्य कल्याण रत्नविजय जी म. सा. का “आत्म कल्याणकारी” चातुर्मास हनुमान रुंडी पर धर्ममय वातावरण में बड़े उल्लास से संपन्न हो रहा है। परम पूज्य गणिवर्य कल्याण रत्नविजय जी म. सा. के प्रतिदिन प्रात 9:00 से 10:15 तक रामायण महाकथा पर एवं रात्रि 8:30 से 9:30 सिर्फ पुरुषों के लिए विशेष प्रवचन चल रहे हैं, जिसमें प्रतिदिन सैकड़ो की संख्या में श्रावक श्राविकाएं धर्म लाभ लेरही है। उपरोक्त जानकारी देते हुए आराधना भवन जैन संघ अध्यक्ष अशोक लुनिया एवं सचिव हिम्मत गेलड़ा ने बताया कि प्रवचन प्रभावक कल्याण रत्नविजय जी के चातुर्मास में अनेक साधक हस्त लेखन, जाप, तप,स्वाध्याय वैयावच्च आदि अनेक प्रकार से सुबह से शाम तक जुड़े रहते हैं। उसी के अंतर्गत संघ के सुश्रावक जयेश लुक्कड एवं शीतल सकलेचा ने केश लोचन कराया। इस अवसर पर परम पूज्य गणिवर्य कल्याणरत्न विजय जी म.सा. ने फरमाया कि साधु जीवन एक कठिन साधना है। केश लोचन में हाथ से बालों को खींचकर निकालना होता है। साधु भगवंत के अलावा श्रावक श्राविकाएं वर्ग भी इस साधना को कर सकते हैं। साधक इसे सफलतापूर्वक सहन कर पापों का लोचन मानकर हो रहे कष्ट को प्रसन्नता से सहन करता है। श्री जयेश लुक्कड एवं शीतल सकलेचा के केश लोचन करने पर आराधना भवन के ट्रस्टी अशोक लुनिया, पप्पू मुंबई वाला, हिम्मत गेलड़ा, राजेश गांधी, पारस मूणत, जीवन पितलिया,अमृत जैन, राकेश सकलेचा, राजेंद्र लुनिया, विजय मेहता, आराधना सेवा समिति के मुकेश गांधी, जयंतीलाल कटारिया, नरेंद्र घी वाला, चंद्रवीर परिवार के अमृत जैन, योगेंद्र जैन, मनीष पटवा, दीपक कटारिया आदि ने अनुमोदना की।