
रतलाम, 11 अगस्त। वस्तु, व्यक्ति, परिस्थिति बीमारी के समय सहानुभूत नहीं बनती है। इस जगत में यदि कोई सहारा है तो वह धर्म है। धर्म को दुश्मन नहीं दोस्त बना लो और कर्म को कभी दोस्त मत मानो। जीवन में भी कोई अच्छा करने वाला है तो वह धर्म है और बिगाड़ने वाला कर्म। मनुष्य को वस्तु और व्यक्ति गलत लगते हैं लेकिन पाप और कुकर्म नहीं। यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा ने मोहन टाॅकीज, सैलाना वालों की हवेली में कहीं। आचार्य श्री ने बताया कि प्रारंभिक रूप का धर्म स्वधर्म कहलाता है। कृष्ण ने अर्जुन को धर्म का उपदेश दिया। प्रभु की पूजा अर्चना करना शुभ धर्म कहलाता है। शुभ धर्म आवृत्ति में झलकता है और शुद्ध धर्म प्रवृत्ति में झलकता है। शुभ धर्म से स्वर्ग मिलेगा लेकिन मोक्ष की प्राप्ति शुद्ध धर्म से होगी। आचार्य श्री ने कहा कि कुत्ते पर जब वार करते हैं तो वह पत्थर फेंकने वाले को नहीं देखता, पत्थर को सूंघता है। इसके विपरीत शेर पर जब कोई तीर छोड़ता है तो शेर तीर को नहीं देखता, वह यह देखता है कि तीर किस दिशा से आया है। एक पत्थर को प्रहार का कारण मानता है तो दूसरा दिशा को। कुत्ता निमित को कारण मानता है, वह मूल को कारण मानता है लेकिन अपराध कर्म का होता है। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित रहे। रविवार को होगा अंतिम युवा शिविर श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के तत्वावधान में सैलाना वालों की हवेली, मोहन टाॅकीज में रविवार, 13 अगस्त को आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में पांचवां और अंतिम युवा शिविर ” यह आंसू वंदनीय है ” विषय पर होगा। शिविर के लाभार्थी विधायक चेतन्य काश्यप एवं परिवार रहेगा। शिविर में भजनों की प्रस्तुति देने गुजरात अहमदाबाद से संगीतकार हार्दिक भाई शाह आएंगे।