- वनवास राम को था, लक्ष्मण ने भी वनवास काटा , पर आज तो भाई -भाई को देखना नहीं चाहता-आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी मसा
- सोमवार से शुरू होगा पर्यूषण महापर्व
रतलाम,13 अगस्त। यदि संकीर्णता में रहे, तो भाई को भाई का प्रेम याद नहीं रहेगा। राम, लक्ष्मण और भरत का प्रेम देखो, वनवास राम को हुआ, लक्ष्मण को नहीं, परंतु लक्ष्मण ने भी भाई-भाभी के साथ वनवास काटा। भरत राजा होते हुए भी वनवासी की तरह रहे। लेकिन विडंबना है कि आज भाई, भाई को देखना नहीं चाहता। संकीर्णता और स्वार्थ में व्यक्ति सबकुछ भूल रहा है, इससे बचो और अपनी सोच को बडी बनाओं
यह आव्हान परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने किया। छोटू भाई की बगीची में प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि दुर्मति ही संकीर्णता पैदा करती है। संकीर्णता का मतलब झूठ को स्वीकार करना और सच से इन्कार करना है। बहुत सारी मान्यताएं और परंपराए व्यक्ति को संकीर्ण बनाती है, उनमें कोई सत्यता अथवा वास्तविकता नहीं होती, लेकिन फिर भी हमारे भीतर उन मान्यताओं और परंपराओं को छोडने का साहस नहीं होता। साहस जो भी रखते है, वे सत्य को स्वीकारने लगते है और सत्य स्वीकार करना ही विस्तृतता है।
आचार्यश्री ने कहा कि स्वाद को छोडने से शरीर को लाभ है। विवाद को छोडने से संबंधों को लाभ है और प्रमाद छोडने से जीवन को लाभ होता है, लेकिन संकीर्णता छोड दी जाए, तो सबकों लाभ ही लाभ है। संकीर्णता रखने से सबको नुकसान ही नुकसान होता है। संकीर्ण दृष्टि, संकीर्ण सोच और संकीर्ण भाव खुद के लिए और दूसरों, सबके लिए घातक है। इनसे कई बार हास्यास्पद स्थिति भी निर्मित हो जाती है। संकीर्णता, कटटरता पैदा करती है। कटटर लोग विचारवान और प्रज्ञावान नहीं होते। इससे कटटरता चाहे जाति की हो, धर्म की हो, सम्प्रदाय की हो, वह नासूर जैसी होती है। भगवान महावीर ने मनुष्य जाति एक बताई है, फिर आपस में ये भेद है? इन सबसे हमे बचना चाहिए। आरंभ में उपाध्याय प्रवर, प्रज्ञारत्न श्री जितेश मुनिजी मसा ने आचारण सूत्र का वाचन किया। विद्वान सेवारत्न श्री रत्नेश मुनिजी मसा ने भी भाव व्यक्त किए। प्रवचन के दौरान बडी संख्या में श्रावक-श्राविकागण मौजूद रहे।
पर्यूषण पर्व में नो कम्पलेन डे का संकल्प
आचार्यश्री की निश्रा में 14 अगस्त से पर्यूषण पर्व की विशेषा आराधना शुरू होगी। उपाध्याय प्रवर, प्रज्ञारत्न श्री जितेश मुनिजी मसा ने आठ दिनों के पर्व में सबसे तप,त्याग और संयम का पालन करने का आव्हान किया। उनकी प्रेरणा से सबने आचार्यश्री से आठों दिन नो कम्पलेन डे मनाने का संकल्प लिया। पर्यूषण के दौरान सिलावटों का वास स्थित नवकार भवन में प्रतिदिन अखंड नवकार मंत्र जाप होगा। तपस्या का क्रम भी लगातार जारी रहेगा। रविवार को महासती श्री मोहकप्रभाश्री जी मसा ने 10 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। सुनीता व्होरा ने 17 उपवास, शिखा भंडारी ने 13 उपवास तथा लीलादेवी संचेती ने सिद्धी तप की अठठाई और रूपाली मेहता ने 4 उपवास के प्रत्याख्यान लिए।