2500 से अधिक श्रावक श्राविकाओं ने आदित्य मुनि मसा की निश्रा में एक स्वर में लिया संकल्प

रतलाम । आचार्य श्री रामलाल जी मसा के आज्ञानुवर्ती शासन दीपक आदित्य मुनि महाराज साहब ने पर्युषण महापर्व के चतुर्थ दिन समता भवन गोपाल गोशाला कालोनी पर प्रवचन में ढाई हजार से अधिक श्रावक श्राविकाओ को भ्रूण हत्या नहीं करने नही करवाने और उस घोर पाप के लिए। प्रोत्साहित नहीं करने के सौगंध कराते हुए संकल्प दिलाया । उन्होंने प्रवचन में फरमाया कि नारी बेटी भी है मां बहन पत्नी भी है इसके अनेक रूप हैं यह एक घर को नहीं संभालती दो दो घर की शान रखती है समाज का नेतृत्व भी करती है देश को जब जरूरत पड़ी तब अपनी शक्ति से देश की रक्षा भी की महारानी लक्ष्मी बाई ,माता त्रिशला, देव की माता, पार्वती माता,चंदनबाला, ऐसे कई उदाहरण देकर उन्होंने नारी के सम्मान के बारे में बताया उन्होंने कहा जहां नारी का सम्मान नहीं वहां लक्ष्मी का वास नहीं सरस्वती का वास नहीं एक नारी के बिना परिवार ही नहीं समाज भी अधूरा है जैन धर्म में नारी के स्थान पर जोर देते हुए कहा कि नारी ने तीर्थंकर गोत्र का भी बंध किया है साथ ही कई साधविया समाज मैं धर्म में परिवार में संस्कार संस्कृति को जागृत करने का कार्य कर रही है परिवार की सेवा के साथ-साथ समाज सेवा में भी जुटी हुई है बच्चों की पहली गुरु मां ही होती है उनका पालन पोषण मां से ही है पिता भी अपनी जवाबदारी को अच्छे से पूर्ण करते हैं परंतु मां के गर्भाशय में से ही बच्चों की शिक्षा शुरू हो जाती है एक मां अपने ज्ञान शिक्षा से पुत्र हो या पुत्री उसे सत मार्ग की ओर ले जा सकती है समाज कल्याण में सहायक बन सकती है क्योंकि संतान का विशेष लगाव, प्रेम ,मां से अधिक होता है एक पिता का ऐसा ही लगाव अपनी बेटी से अधिक होता है एक पत्नी अपनी बचपन की यादों को छोड़ नए परिवार में प्रवेश कर अपनी नवीनता लिए सबको अपने सांचे में ढाल लेती है यह होती है स्त्री इसलिए स्त्री की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है उसे सिर्फ दिखावे के लिए सम्मान नहीं दे परिवार में, समाज में, राष्ट्र में ,व्यापार में ,घर में ,हर उस स्तर तक सम्मान देकर साहसी बनाते हुए समकक्ष रखने का प्रयास करें जिससे लोगों में बेटियों के जन्म को लेकर कोई संशय नहीं रहे, भ्रूण हत्या की तरफ वह सोचे भी नहीं, उनके मन में वह विचार भी नहीं आए, नारी के प्रति सम्मान सिर्फ सरकार का काम नहीं यह जवाबदारी हम सब की भी है ।इतिहास उठाकर देख लो भगवान महावीर के समवशरण में गौतम स्वामी के 14000 शिष्य थे परंतु सती चंदनबाला के साथ 36000 शिष्या थी, ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां नारी का बाहुल्य भी अधिक है, पुरुषार्थ भी अधिक है, परंतु वह पुरुष के सम्मान में परिवार के सम्मान में अपने आप को पीछे रख आपको आगे करती है। भगवान महावीर को साक्षी मानकर गुरु भगवंत आचार्य रामलाल जी महाराज साहब को साक्षी मानकर सभी श्रावक श्राविका यह संकल्प लें कि हम भ्रूण हत्या करेंगे नहीं, करवाएंगे नहीं ,करने वाले को प्रोत्साहन देंगे नहीं, उसका साथ देंगे नहीं ,हम उसका विरोध करेंगे क्योंकि आप दिन भर भी धर्म कर रहे हैं ,पूरी जिंदगी भी धर्म कर रहे हैं, पर आपने उसे जीव को तड़प तड़प कर अगर मार दिया तो आपका पाप का उदय बढ़ता चला जाएगा वह धर्म भी आपके साथ नहीं आएगा। उपरोक्त जानकारी देते हुए साधुमार्गी जैन संघ के प्रीतेश गादिया ने बताया कि महाराज साहब द्वारा दिलाए गए इस संकल्प के पश्चात राम गुरु की जय जय कार के नारों के साथ पूरा सभागृह गूंज उठा।इस अवसर पर साधुमार्गी जैन संघ के अध्यक्ष सुदर्शन पीरोदिया ने अपने भाव में कहा कि इस प्रकार का संकल्प जो हमें संयम मार्ग पर ले जाता है वैसी प्रेरणा आज हमें महाराज साहब द्वारा दी गई वह हमारे जीवन को एक अनुपम राह की ओर ले जाएगा । संचालन दशरथ बाफना ने किया व सभा में विनोद मेहता चंदन पीरोदिया पवन गोरेचा आदि ने अपने भाव रखें। गादिया ने यह भी बताया की पर्युषण के पावन अवसर पर समता युवा संघ, बहु मंडल ,बालक मंडल, बालिका मंडल, महिला मंडल, द्वारा स्तवन, तात्कालिक भाषण, धार्मिक फैंसी ड्रेस ,ड्राइंग ,ऐसी कई प्रतियोगिता का आयोजन दोपहर दो से चार बजे तक भवन गौशाला कॉलोनी पर भी चल रहा है।