



इंदौर।आध्यात्मिकता की दुहाई देने वालों के सामने वृद्ध आश्रम होना मानवता पर कलंक औरशर्मसार करने वाली घटना है उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनी कमलेश ने व्यक्त करते हुए कहा कि जिस संस्कृति में मातृ पितृ देवो भव की अवधारणा हो यह सब पुनः साकार करने का संकल्प लेना है। उन्होंने कहा कि वृद्ध व्यक्ति अनुभवों का खजाना होता है ग्रंथ पंथ और संत से बढ़कर होता है उनका आशीर्वाद उत्थान में सहयोगी बनता है।
राष्ट्र संत ने कहा कि उनके कर्ज से कभी मुक्त नहीं हो सकते उनकी आंखों में गर्म पानी आ गया तो हमारी सारी साधना मिट्टी में मिल जाएगी।
दिगंबर आचार्य विहर्ष सागर जी ने कहा कि सबसे पहले तीर्थ तो माता-पिता है जिन्होंने दुनिया में इस योग्य अपने को बनाया हमारे लिए यह भी परमात्मा का रूप है। अभिग्रह धारी श्री राजेश्वरी जी ने कहा कि देव भी भगवान से पूर्व उनके माता-पिता के गुण अनुवाद करते हैं। श्वेतांबर मूर्ति पूजक श्री आनंद सागर जी ने कहा कि वृद्धो को अनदेखा उपेक्षा करना धर्म का अपमान करने के समान है।
अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली के राष्ट्रीय संरक्षक से अशोक मेहता ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय जैन फेडरेशन के द्वारा 300 के करीब समाज के 80 साल के ऊपर धार्मिक वरिष्ठ जनों का अभिनंदन किया गया। कांतिलाल बम ने आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम की पूरे शहर में मुक्त कंठ से प्रशंसा हो रही है।
