चौराहों की भीड पुलिस नियंत्रित करेगी, लेकिन कुविचारों की भीड खुद नियंत्रित करनी होगी-आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी मसा

छोटू भाई की बगीची में सन्मति के गुणों पर प्रवचन

रतलाम, 23 अगस्त। संसार में आज विचारों की बहुत भीड है, जिससे मन में कई कुविचार आते है। चौराहों पर लगने वाली भीड को तो यातायात पुलिस नियंत्रित करती है, लेकिन अपने अंदर के विचारों की भीड हमे ही नियंत्रित करनी पडेगी। इस भीड को नियंत्रित करने की शक्ति केवल सम्यक ज्ञान में है। सम्यक ज्ञान ही सन्मति का पहला गुण हैं।
यह बात परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने कही। छोटू भाई की बगीची में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान सन्मति के गुणों की व्याख्या शुरू करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को जीवन में निर्विचार बनने का उच्चतम लक्ष्य रखना चाहिए। इसके लिए कुविचारों का तिरस्कार और सुविचारों को सम्मान देना आवश्यक है। सही को सही और गलत को गलत जानना ही सम्यक ज्ञान है। सम्यक ज्ञान से सुविचारों को स्थायित्व मिलता है।
आचार्यश्री ने कहा कि सम्यक ज्ञान सबके भीतर है, क्योंकि जानने की शक्ति केवल चेतन्य में है, जड में नहीं होती है। हमारा ज्ञान जब पवित्र विचारों को आदर करता है, तभी सम्यक ज्ञान कहलाता है। विचारों में अपवित्रता दोष होती है। मन में जब तक कुविचारों की चेन नहीं टूटती, तब तक शांति, संतुष्टि और समाधि प्राप्त नहीं होती है। इसके लिए सम्यक ज्ञान होना अति आवश्यक है।
आचार्यश्री ने विचारों का चैकीदार बनने पर जोर देते हुए कहा कि जैसे अवांछित को अंदर नहीं आने देता और वांछित को बाहर नहीं करता। वैसे ही हर व्यक्ति को अपने अंदर अवांछित विचारों को जाने से रोकना चाहिए। वांछित विचार को सदैव आने दो। विचारों के चैकीदार बनो, मालिक मत बनो, तो सम्यक ज्ञान प्राप्त हो जाएगा।
आरंभ में उपाध्याय प्रवर श्री जितेश मुनिजी मसा ने आचारण सूत्र का वाचन किया। श्री हुक्मगच्छीय साधुमार्गी शान्त-क्रांति संघ के राष्ट्रीय महामंत्री विरेन्द्र जैन ने संबोधित किया। आचार्यश्री ने महासती श्री मोहकप्रभाजी मसा ने 20 उपवास, सुश्राविका सुनीता बोहरा ने 27 उपवास एवं सिद्धी तप कर रही रूपाली मेहता ने 5 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। संचालन हर्षित कांठेड ने किया। इस दौरान सैकडों श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।