हमारे जीवन में ब्रिज होना बहुत जरूरी है शासन दीपक आदित्य मुनि

रतलाम। आचार्य श्री रामलाल जी म सा के आज्ञानुवर्ती शासन दीपक श्री आदित्य मुनिजी मसा ने प्रवचन में फरमाया कि जुड़ाव एक महत्वपूर्ण शब्द है जो गुरु शिष्य ,माता-पिता, भाई-बहन ,पति-पत्नी ,भाई-भाई, मित्र सखा,दादा पोता, आदि किसी के भी बीच में एक महत्वपूर्ण कड़ी है आज का विषय जुड़ाव द ब्रिज (BRIDGE )का अर्थ है की बी से बिलीव भरोसा ,आर से रिस्पॉन्सिबिलिटी जवाबदारी, आई से इंटीग्रिटी निष्ठा, डी से डेडीकेशन समर्पण,जी से ग्रेटीट्यूड, ई से इमोशन भावना होता है जब दो लोगों का आपस में विश्वास निष्ठा कर्तव्य समर्पण जवाबदारी का भाव होता है वहां जुड़ाव होता है जिस प्रकार एक कन्या का विवाह होता है और वह नये घर में प्रवेश करती है ससुराल की सभी आज्ञा को नीति रीति को पूर्ण भाव से अपनाती है उसके मन में उस परिवार के प्रति निष्ठा पैदा होती है यही जुड़ाव है उसके पश्चात वही लड़की घर की मालकिन बन जाती है सब उसके कहे अनुसार होने लगता है वह उसकी समर्पना का प्रतिफल है इसी प्रकार आप कोई भी कार्य करते हैं उसके प्रति आपका भावार्थ समर्पण का हो तो उसका प्रतिफल अति उत्तम आता है। हमें जीवन में कोई भी कार्य अगर करना है तो हमें उसको मन से स्वीकार करते हुए उसके प्रति वफादारी से अपनी कर्तव्य निष्ठा का परिचय देना होगा तो ही हम जीवन में सफल हो पाएंगे उपरोक्त जानकारी देते हुए साधुमार्गी जैन संघ के प्रीतेश गादिया ने बताया कि सभा में संघ अध्यक्ष सुदर्शन पिरोदिया मंत्री ,दशरथ बाफना द्वारा बाहर से पधारे चरित्र आत्माओं के सांसारिक परिवारों का व इंदौर नीमच जावद मन्दसौर के श्रावक श्राविकाओं का शाब्दिक स्वागत किया गया एवं कई भाई बहनों की मासखमन तपस्या की ओर तप गतिमान है 14 उपवास 16 उपवास 28 उपवास 20 उपवास के पचखान लिए गए हे व सभा का संचालन प्रीतेश गादिया ने किया।