रतलाम,28 अगस्त। शरीर में जैसे आंखों का महत्व होता है, वैसे ही जीवन में ज्ञान का महत्व है। ज्ञान के बिना जीवन अधूरा है। ज्ञान के बिना दृष्टि सम्यक नहीं बनती और दृष्टिकोण भी प्राप्त नहीं होता। ज्ञान तीन दृष्टिकोण -पहला प्रेम का, दूसरा साधना का और तीसरा क्षमा का देता है। प्रेम से साधना उत्कृष्ठ है और साधना से क्षमा सर्वोत्कृष्ट होती है।
यह बात परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने चातुर्मासिक प्रवचन में कही। छोटू भाई की बगीची में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए उन्होेंने कहा कि सन्मति के पहले गुण सम्यक ज्ञान से जीवन प्रकाशवान होता है। इससे मिलने वाले दृष्टिकोण से परिवार में प्रेम का वास होता है। साधना मिलती है, तो मनुष्य स्वयं को भूल जाता है और परमात्मा को समर्पित होता है। इसी प्रकार क्षमा के दृष्टिकोण से अपने अपराधों को विस्मृत कर जाता है। ज्ञान नहीं होगा, तो प्रेम, साधना और क्षमा कुछ भी प्राप्त होने वाले नहीं है।
आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में गलत करने पर उसे भूलना चाहिए, क्योंकि जहां याद रहे, वहीं विवाद होता है। विवाद ही विद्वेष पैदा करता है। ज्ञानियों ने इसीलिए भूलने योग्य बातों को भूलने पर जोर देते हुए क्षमाशील बनने के लिए कहा है। क्योंकि क्षमावंत व्यक्ति सदैव सुखी रहता है। मनुष्य जीवन में यदि शिखर पर जाना हो तो सम्यक ज्ञान की आराधना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में जागरण बहुत जरूरी है। शरीर से मनुष्य भले ही जगा हुआ हो, लेकिन आत्मा जागृत होना चाहिए। आत्मा के जागरण से ही सम्यक ज्ञान प्राप्त होता है।
आचार्यश्री ने इस मौके पर कई भक्तों को त्याग एवं तपस्या के प्रत्याख्यान कराए। इससे पूर्व उपाध्याय प्रवर श्री जितेश मुनिजी मसा ने आचारण सूत्र का वाचन करते हुए संयम में रूचि रखने का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि सांसारी जीवन में जैसे व्यक्ति जिससे प्रेम होता है, उस पर सबकुछ लुटाना चाहता हैं, वैसे ही धर्म के क्षेत्र में भक्त अपने भगवान पर सब लुटाता है। संयम के प्रति रूची होगी, तो इससे जुडे प्रत्येक उपक्रम में श्रद्धा का भाव रहेगा।
पुस्तक का विमोचन
धर्मसभा में आचार्यश्री ने 51 वर्ष के संयमी जीवन पर केन्द्रित संस्मरणों की पुस्तक का विमोचन किया गया। महासती श्री इन्दुप्रभाजी मसा द्वारा संकलित इस पुस्तक का विमोचन संतोष पोंचा, अरूण जैन, इन्द्रचंद हरकावत एवं त्रिलोकचंद गोलेचा ने किया। इस दौरान सैकडों श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।