राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जोड़कर जिले की महिलाएं सफलता की नई इबारत लिख रही है

रतलाम 07 सितंबर 2023। रतलाम जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर जिले की महिलाएं विकास और सफलता की नई इबारत लिख रही है। मिशन के अंतर्गत जिले में 7249 स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं जिनसे जिले की 82 हजार महिलाएं जुड़ चुकी हैं। रतलाम जिले में मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन मुख्यमंत्री श्री शिवराज चौहान की मंशा अनुसार महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में कामयाब सिद्ध हो रहा है।
कलेक्टर श्री नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि रतलाम जिले में आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की पढ़ी-लिखी सदस्यों को विभिन्न विषयों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। महिलाएं बैंक सखी, बैंक बीसी, उद्यम सखी, कृषि सखी, पोषण सखी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। सखियां बैंकों में खाता खुलवाने, वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने, ऋण दिलवाने का काम कर रही है। कुछ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों को नवीन आजीविका गतिविधियां प्रारंभ करने में भी सहयोग कर रही हैं। मिशन से जुड़ी महिलाएं एक दूसरे के लिए प्रेरक का काम करती हैं। एक महिला सफल होती है तो दूसरी महिला को सफलता की राह दिखाती है।
जिले में लगभग 2000 स्वयं सहायता समूहों को बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया गया है। ऋण प्राप्त करके महिलाओं द्वारा किराना दुकान, ब्यूटी पार्लर, जनरल स्टोर, सिलाई, मुर्गी पालन, बकरी पालन, अचार उत्पादन, चप्पल निर्माण, डेयरी जैसी कई आय उत्पादक आर्थिक गतिविधियों की जा रही हैं जिससे उनके परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं। अब इनको किसी और के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता है। जिले में 272 स्वयं सहायता समूह को मुर्गीपालन के लिए चिन्हांकित किया गया है इनमें से 45 समूह सदस्यों ने मुर्गी पालन प्रारंभ कर दिया गया।
रतलाम ग्रामीण क्षेत्र के कलोरीखुर्द की जय माता दी समूह की चार महिलाओं ने तथा पिपलोदा जनपद के ग्राम सुखेड़ा के कृष्ण आजीविका समूह की चार महिलाओं ने कच्ची केरी एवं लहसुन के अचार का निर्माण प्रारंभ किया है। अभी तक दो क्विंटल से अधिक अचार बनाकर विक्रय कर चुकी है। जनपद पंचायत बाजना की रावटी ग्राम पंचायत के साथ समूहों की 37 महिलाओं द्वारा रेशम चूड़ी निर्माण किया जा रहा है। जिले के चार समूहों की 20 महिलाओं द्वारा स्लीपर चप्पल बनाने का कार्य किया जा रहा है। प्रतिदिन यह महिलाएं 300 से 400 जोड़ी चप्पल बनाकर स्थानीय बाजारों और व्यापारियों को विक्रय करती हैं। प्रति जोड़ी औसत 20 से 25 रूपए इनका लाभ मिलता है। इसके अलावा महिलाएं मसाला निर्माण, दाल, नमकीन उत्पादक, टमाटर लहसुन चटनी, झाड़ू उत्पाद, अगरबत्ती, सॉफ्ट टॉय, जैविक खाद, झूमर निर्माण इत्यादि आर्थिक गतिविधियां भी संचालित कर रही हैं।