तड़प, दर्शन, वंदन, शरण और समर्पण से होगा प्रभु मिलन- आचार्य श्री




रतलाम, 10 सितंबर 2023। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. का 56 वां जन्मदिन प्रभु मिलन उत्सव के रूप में आनंदमयी माहौल में उल्लास पूर्वक मना। इस अवसर पर सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में आचार्य श्री ने प्रभु मिलन के लिए तड़प, दर्शन, वंदन, शरण और समर्पण का भाव मन में रखने पर जोर दिया।आचार्य श्री की जन्मोत्सव पर प्रभु की सुंदर अंग रचना कर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया था।
आचार्य श्री ने तन, मन, जीवन को स्वस्थ रखने के लिए कम खाओ, गम खाओ और नम आओ का गुरू मंत्र देते हुए कहा कि प्रभु में मिटने की भूमिका होनी चाहिए मिलने की नहीं। मिलना और मिटना में जमीन आसमान का अंतर होता है। दूध में शक्कर मिल जाती है लेकिन पानी में पत्थर नहीं मिलता। हमें प्रभु में मिलना है या मिटाना है, यह स्वयं तय करना है। हमारा अस्तित्व खतरे में है क्योंकि हम प्रभु से मिले हैं, मिटे नहीं। प्रभु में मिटने के लिए मन में कठोरपन चाहिए।
आचार्य श्री ने कहा कि ज्ञान के तप से आप पानी तक जा सकते हो,लेकिन भक्ति तप से आप पानी को अपने पास ला सकते हो। जिस तरह से सुबह उठते ही चाय की तड़प रहती है, उसी प्रकार प्रभु की तड़प रहनी चाहिए। जिस चीज की प्यास होती है, उसके दर्शन करने का आनंद अलग ही होता है। हमने मानव तत्व पर तो मेरा का लेबल लगाया है लेकिन प्रभु पर नहीं। यदि आपको प्रभु अच्छे लगे तो सद्गति मिलेगी और अपने लगे तो परम गति मिलेगी।
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा. ने इस मौके पर आचार्य श्री के तीन गुण परफेक्शन, प्रिपरेशन और प्रेजेंटेशन का वर्णन करते हुए सभी से इन्हे जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्री संघ के पदाधिकारी एवं श्रावक-श्राविकाएं एवं गुरू भक्त उपस्थित रहे।
उत्सव के लाभार्थी परिवार का श्री संघ ने किया बहुमान
श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा प्रभु मिलन उत्सव के लाभार्थी का बहुमान किया गया | संघ पदाधिकारियों ने लाभार्थी सम्पतबाई मेघराजजी कटकानी, कनकमलजी सूरजमलजी गुगलीया, राजेन्द्रकुमार अनुपकुमार अमीतकुमार कोठारी, सोनाली मनीष जैन, निधि सुनिल सूर्या, प्रेमकांता चंदुलालजी कंकटेचा, आशीष सुरेन्द्रकुमारजी नवलखा परिवार का शाल श्री फल से बहुमान किया। महाराष्ट्र से आई मुमुक्षु का भी बहुमान किया गया। उत्सव के दौरान मुंबई के माटुंगा का दल आकर्षण का केंद्र रहा। उसने अनूठी प्रस्तुतियां दी |