राष्ट्र की उन्नति में हिंदी का महत्वपूर्ण योगदान है

रतलाम। हिंदी दिवस के उपलक्ष में शासकीय माध्यमिक विद्यालय बोदिना में कार्यक्रम संपन्न हुआ । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैलाश नारायण भाटी , अध्यक्षता श्रीमती तरुण‌ बाला ग्वाले , विशेष अतिथि श्रीमती अनामिका वायगांवकर रहे । अतिथियों द्वारा सर्वप्रथम मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पहार दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । अतिथि भाटी जी द्वारा आज हिंदी दिवस के उपलक्ष में बच्चों को हमारे देश की प्राचीनतम विरासत के बारे में बताया कि हमारा देश भौगोलिक दृष्टि से ईरान इराक से लेकर ब्रह्मदेश म्यानमार तक फैला हुआ था हमारी प्राचीन संस्कृति, सनातन संस्कृति की ही देन रही है । इस भारत देश को जोड़कर रखा है और इस महानतम देश में संत ,ऋषि मुनि ,तपस्वी हुए हैं जिन्होंने अपने तपस्या, तप के बल पर अपने ज्ञान के द्वारा अपने विज्ञान के द्वारा संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए वेदों, पुराणो , शास्त्रों, महाकाव्यो की रचना की ।एक वैभवशाली इतिहास हमारे बीच प्रस्तुत किया। हमारे यहां पर मां के गर्भ से लेकर अंतिम समय तक हिंदी व संस्कृत भाषा का बहुत ही महत्व रहा है ।जिसका आदर्श उदाहरण अभिमन्यु का हम सबके बीच में है । संपूर्ण विश्व जो आज तरक्की कर रहा है ,उन्नति कर रहा है, वह हमारे वेदों के ज्ञान के द्वारा ही संभव हो पाया है । निज भाषा उन्नति अहे,सब उन्नति को मूल ।बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को शुल । आज आवश्यकता हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी को सर्वोच्च शिखर पर ले जाने की है ,क्योंकि जितने भी विकसित राष्ट्र हैं उन्होंने अपने देश की निज भाषा के माध्यम से उन्नति की है ,किंतु गुलामी के कुछ कालखंड के दौरान तथा कुछ लोगों ने हमारे निज भाषा को उतना महत्व नहीं दिया ,इस कारण हमारा देश पिछडा रहा, हमारा देश विविधताओं से भरा हुआ है, जम्मू कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक अटक से लेकर कटक तक संपूर्ण भारतवर्ष में लगभग 22 से अधिक भाषाएं, 1652 से अधिक बोलियां हैं वर्तमान समय में हमारी हिंदी भाषा का महत्व संपूर्ण विश्व में फैला है ,लगभग 100 से अधिक देशों में हिंदी भाषा को जानने वाले निवास करते हैं । कार्यक्रम का सफल संचालन चंद्रकांत वायगांवकर ने किया ।