- नवकार भवन में संवत्सरी पर की स्व आलोचना
रतलाम,19 सितंबर। क्रोध चांडाल है, क्रोध महाकाल है। इससे बचो और क्षमा को अपनाओ। क्षमा के रस में जो भी रमेगा अथवा इसका स्वाद लेगा,वह दिव्य अनुभुति करेगा। क्षमा आत्मा की क्षमता है। इससे जीवन क्षमतावान, ममतावान और समतावान बन जाता है।
यह बात परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने सिलावटों का वास स्थित नवकार भवन में कही। उनकी निश्रा में श्रावक-श्राविकाओं ने दूसरे पर्यूषण में स्व आलोचना कर संवत्सरी पर्व मनाया। आचार्यश्री ने कहा कि आज सबकों क्षमा को धारण करने का संकल्प लेना चाहिए, क्योंकि संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता। रतलाम में संकल्प की शक्ति का ही प्रताप है कि मासक्षमण, अठठाई, तेेले, बेले और सिद्धी तप की कई आराधनाएं हो रही है। इस वर्ष सभी धर्म स्थानों में तपस्या का ठाठ लगा हुआ है, जिसकी जितनी अनुमोदना की जाए, वह कम होगी।
आचार्यश्री ने कहा कि बिना समता और ममता के क्षमा को धारण नहीं किया जा सकता। क्षमा वीरों का आभूषण होती है, उसका वरण कायर नहीं कर सकते। भगवान महावीर को भी कई कष्ट दिए गए, लेकिन उन्हांेने हंसते-हंसते सबकों सहन किया। उनका जीवन अनुकरणीय है। इससे प्रेरणा लेकर सभी क्षमा का धारण करे और अपने पापों की आलोचना कर आत्मा का कल्याण करे।
अपनी आलोचना से जीवन शुद्ध-विशुद्ध बनेगा
उपाध्याय प्रवर श्री जितेश मुनिजी मसा ने कहा कि अपने पांव का कांटा जैसे दूसरों के सहयोग से अच्छे से निकलता है, वैसे ही गुरूदेव से सहयोग से अंदर के दोषों को दूर करने का अवसर मिला है। इसका भरपूर लाभ उठाए और इमानदारी से अपनी आलोचना करे। इससे जीवन शुद्ध-विशुद्ध बनेगा। इस मौके पर आचार्यश्री से श्री जयमंगल मुनिजी मसा एवं महासती श्री ख्यातिश्री जी मसा ने 8-8 उपवास, संजय मेहता ने 32 उपवास, किरण बेन पिरोदिया ने 9 उपवास, युवा संघ के महामंत्री हर्ष पटवा ने 8 उपवास एवं प्रांजल पटवा ने 6 उपवास तथा अनिता रांका ने सिद्धी तप की लडी में 6 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। कई आराधकों ने उपवास, बेले और तेले के प्रत्याख्यान भी लिए। इस दौरान बडी संख्या में श्रावक-श्राविकागण उपस्थित रहे।