छोटू भाई की बगीची में चातुर्मासिक प्रवचन
रतलाम,23 सितंबर | भाग्यवान कौन? धन के साथ जिसके पास धर्म है, परिवार के साथ जिसके पास प्रेम है, बिस्तर के साथ जिसके पास नींद है, भोजन के साथ जिसके पास भूख है, वो भाग्यवान है। विडंबना है कि आज हमारे पास धन तो बहुत है और धन से हम शिखर पर पंहूचे हुए है, लेकिन धर्म के नाम पर शून्य है। धर्म के नाम पर यदि शिखर पर होते,तो भाग्यवान कहलाते है।
यह बात परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने कही। छोटू भाई की बगीची में चातुर्मासिक प्रवचन में उन्होंने कहा कि धन तो पुण्य के उदय से प्राप्त होता है, जबकि धर्म का संबंध पुरूषार्थ के साथ है। पुरूषार्थ करने पर ही हम धार्मिक बन सकते है। गृहस्थ जीवन में यदि धन आवश्यक है, तो धर्म अनिवार्य है। धन के साथ धर्म है, तो आप भाग्यवान है। इसी प्रकार परिवार के साथ प्रेम है तो भी आप भाग्यवान है।
आचार्य श्री ने कहा कि आज परिवार लम्बा चौड़ा है, पर प्रेम नहीं है। प्रेम का अभाव हो, टोटा हो, तो परिवार की संख्या क्या काम की । उन्होंने कहा कि जैसे ग्राहक को माल पसंद आ जाता है,तो पैसा अपने आप छूट जाता है, उसे पैसा छोड़ना नहीं पड़ता। वैसे ही अगर धर्म पसंद आ जाता है,तो पाप छूटते देर नहीं लगेगी। धर्म से जीवन में बदलाव आता है। बदलाव कौन लाता है? हमारी पसन्दगी लाती है। जब तक धर्म पसंद नहीं आता,तब तक परिवर्तन नहीं आता। धर्म पसंद आते ही पाप अपने आप छूट जाएंगे। फिर संतों को ये कहना नहीं पड़ेगा, पाप छोड़ो और धर्म करो। उपाध्याय प्रवर श्री जितेशमुनिजी मसा ने आचारंग सूत्र पर प्रवचन दिए | श्री विशालप्रिय मुनिजी मसा ने उत्तराध्यन सूत्र का वाचन किया। प्रवचन मे बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविका गण उपस्थित रहे।