- समन्वय प्रेम सद्भाव धर्म के असली प्राण है- दिगंबर आचार्य पूजा सागर जी
- धर्म के असली प्राण एकता है – उपाध्याय श्री दिव्या चंद्र विजय जी
- प्रेम श्रद्धा भक्ति और समर्पण साधना का राजमार्ग है – महंत रामदास जी



इंदौर (स्मृति नगर दिगंबर जैन पारसनाथ मंदिर 26 सितंबर 2023) । धर्म उपासना पद्धति टकराव अलगाव और नफरत का रूप लेती है वह आत्मा समाज और देश के लिए के लिए अभिशाप बनती है उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनी कमलेश ने 10 लक्षण पर्व संबोधित करते कहा कि उपासना पद्धति के माध्यम से वीतरागता वात्सल और सद्भाव रोम रोम में छलकता वह किसी भी नाम से हो किसी भी रूप में हो और कोई भी साधन हो वह सर्वश्रेष्ठ है।
उन्होंने कहा कि एकता की नींव पर ही अहिंसा की मंजिल खड़ी की जा सकती है एकता सर्वश्रेष्ठ धर्म है। जिसे एकता में विश्वास नहीं अहिंसा उसके पास नहीं। मुनि कमलेश ने कहा कि त्याग के साथ अहंकार है तो जहर का काम करेगा और त्याग के साथ सद्भाव है तो अमृत का काम करेगा।
दिगंबर आचार्य पूजा सागर जी ने कहा कि समन्वय प्रेम सद्भाव धर्म के असली प्राण है इसको आत्मसात किए बिना कितनी कठोर साधना कर ले आत्मा उत्थान संभव नहीं है। धार्मिक सामाजिक राष्ट्र में आत्मीय समरसता की वृद्धि हो यही धर्म का मुख्य लक्ष्य है।
श्वेतांबर मूर्ति पूजक उपाध्याय श्री दिव्या चंद्र विजय जी ने स्पष्ट कहा कि धर्म के असली प्राण एकता है मैं 40 वर्षों की दीक्षा में प्रथम बार में दिगंबर श्वेतांबर स्थानकवासी और सनातन परंपरा एक मंच पर। प्रेम संगम को देखकर अभी भूत हुआ इसके लिए राष्ट्र संत कमल मुनी कमलेश का आभारी हूं इन्होंने मंगल प्रसंग मैं मुझे याद किया।
महंत रामदास जी ने बताया कि राग और द्वेष के भाव अपने आप में हिंसा है इससे आत्मा में धर्म का निवास नहीं होता है प्रेम श्रद्धा भक्ति और समर्पण साधना का राजमार्ग है सभी संतो ने मंच पर खड़े होकर हाथ मिलाकर संपूर्ण देश को सद्भाव और प्रेम का संदेश दिया।
अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली के प्रयासों से दिगंबर श्वेतांबर मूर्ति पूजक स्थानकवासी सभी ने मिलकर प्रस्ताव पास किया। इंदौर में महावीर जयंती का एक जुलूस निकाला जाए 8 दिन के श्वेतांबर पर्यूषण एवं 10 लक्षण पर्व को18 दिवस आत्म शुद्धि पर्व नाम दिया जाए। 10 लक्षण पर्व के बाद आने वाले रविवार को विश्व मित्र दिवस के रूप में सकल जैन समाज एक साथ 1 अक्टूबर को श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः 8:00 बजे दिगंबर श्वेतांबर दोनों परंपरा मिलकर मनाएंगे। संत और संस्कृति रक्षा के लिए संगठित होकर काम करे इंदौर के इतिहास में प्रथम बार यह दुर्लभ क्षण देखकर हजारों लाखों जनता के दिलों में सद्भावों का संचार हो रहा है। भक्ति से नयन छलक रहे हैं दिवाकर मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप राजपाल रतन जैन पारस जैन सौरभ जैन ने सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।