- 16 दिवसीय सुरिमंत्र साधना पूर्ण होने पर निकला भव्य जुलूस
- मुंबई के सुप्रसिद्ध बुद्धि सागर बेंड ने जमाया रंग



रतलाम, 11 अक्टूबर। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने 16 दिवसीय सुरिमंत्र की अखंड साधना पूर्ण कर बुधवार को महामांगलिक श्रवण कराई। इसमें जन सैलाब उमड़ा | इससे पहले सुबह सेठजी का बाजार स्थित आगमोद्धारक भवन से गाजे-बाजे के साथ आचार्य श्री की निश्रा में भव्य जुलूस निकला, जो सैलाना वालों की हवेली मोहन टॉकीज पहुंचकर धर्म सभा में परिवर्तित हो गया । जुलुस में मुंबई के सुप्रसिद्ध बुद्धि सागर बेंड के सुर आकर्षण का केंद्र रहे।
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने महामांगलिक के बाद सेठजी का बाजार स्थित आगमोद्धारक भवन पर संपन्न सुरिमंत्र साधना का पवित्र वासक्षेप प्रदान किया। सुबह आगमोद्धारक भवन से बाहर आते ही श्रद्धालुओं ने जय -जयकार के साथ उनका आत्मीय अभिनंदन कर आशीर्वाद लिया। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के तत्वावधान में जुलूस और प्रवचन के बाद सैलाना वालों की हवेली मोहन टॉकीज में साधर्मिक भक्ति का आयोजन भी किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
सुरिमंत्र साधना मंदिरम में दिनभर लगा श्रद्धालुओं का ताँता
श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा आचार्य श्री के साधना स्थल सुरिमंत्र साधना मंदिरम को सुबह 11 से बजे से श्रद्धालुओ के लिए दर्शन हेतु खोल दिया गया। रात 10 बजे तक मंदिर खुला रहा। सुबह से शाम तक यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का दर्शन लाभ के लिए आना-जाना लगा रहा। सूरिमंत्र साधना मंदिरम् में कलात्मकता-मोहकता एवं सात्विकता की त्रिवेणी संगम हुआ। श्री संघ ने दर्शन हेतु सकल श्री संघ को आमंत्रण दिया था। इसमें देवलोक की दिव्यता, राजमहल की रमणीयता एवं गंगा की पवित्रता का एक साथ दर्शन करना मिला।