अश्रुओं की आदरांजलि के साथ श्रद्धापूर्वक किया श्राद्ध

सर्वपितृ अमावस पर जिला स्तरीय निशुल्क सामूहिक श्राद्धकर्म में हजार से अधिक शामिल

रतलाम 14 अक्टूबर 23 । सर्वपितृ अमावस पर युवा सेवा संघ, रतलाम द्वारा निशुल्क सामूहिक श्राद्ध तर्पण में बड़ी संख्यां में श्राद्धकर्ताओं ने अश्रुओं की आदरांजलि के साथ श्रद्धापूर्वक श्राद्ध किया। दिवगंत परिजनों के साथ मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर अमर शहीदों के साथ कोरोना के दिवंगतजनों का सामूहिक श्राद्ध किया गया।
सर्वपितृ अमावस पर इस वर्ष भी निशुल्क सामूहिक श्राद्ध संत श्री वाटिका चंपाविहार पर रखा गया, जिसमे एक हजार से अधिक नागरिकों ने विधिविधान से श्राद्ध किया। जिला स्तरीय आयोजन में सम्पूर्ण जिले से आये नागरिक शामिल हुए। जगन्नाथ पुरी उड़ीसा के संयमी एवं विद्वान आचार्य श्री शारदा प्रसाद जी मिश्रा ने पूर्ण विधान के साथ सभी क्रियाओं का महात्म्य बतलाते हुए श्राद्ध सम्पन्न करवाई।
पितरों को श्रद्धापूर्वक जलांजलि –
नागरिकों ने विधिपूर्वक देवताओं का स्मरण पूजन सहित सभी तीर्थ का आवाहन किया। तदुपरांत उन्होंने देवता ऋषि दिव्य मनुष्य सहित अपने परिवार के दिवंगत हुए परिजनों का स्मरण ध्यान कर विधिवत रूप से तर्पण कार्य किया। सभी ने अपने पितरों का स्मरण करते हुए श्राद्धकर्ताओं ने अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक जलांजलि देकर परितृप्त किया। साथ ही देश के वीर शहीद सैनिकों का भी सभी ने वैदिक मंत्रोचार से तर्पण किया। वैदिक ज्ञान विज्ञान जागृति पीठ के महर्षि संजय शिवशंकर दवे ने भी मार्गदर्शन दिया।
सतसाहित्य भेंट किया गया
सभी श्राद्धकर्ताओं को दीपावली पर्व के उपलक्ष्य में युवा सेवा संघ द्वारा अभिमंत्रित कुबेर पोटली एवं नवरात्रि विशेषांक ऋषिप्रसाद भेंट की गई। यंहा भोजन प्रसादी की व्यवस्था भी निशुल्क रही।मुख्य जजमान के रूप में राकेश हेमा परिहार दंपति रहे। संचालन शिक्षाविद् रविंद्र सिंह जादौन ने एवं आभार संघ अध्यक्ष रुपेश सालवी ने माना।
पितृदेव शुभ आशीष प्रदान करते हैं- पं.मिश्रा
सर्वपितृ अमावस श्राद्ध का महत्व बतलाते हुए विद्वान ब्राहमण श्री मिश्रा ने बताया कि देव कार्य की अपेक्षा पितृकार्य की विशेषता मानी गयी है । अतः देवकार्य से पूर्व पितरों को तृप्त करना चाहिये । पितृदेवो के प्रति अनुग्रह और दिवंगत परिजन की तिथि सहित श्राद्ध पक्ष में जो विधिवत रुप से उनका धूप ध्यान पूजन तर्पण करता है, वह इस लोक में समस्त सुखों को प्राप्तकर अंत में परम् पद को प्राप्त करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि देवता की पूजा से वंचित रहने पर कोई दोष नहीं लगता परंतु पितरों की पूजा से विमुख रहने पर जीवन अस्त व्यस्त व अशांतियुक्त हो जाता हैं, इसीलिए यथा श्राद्ध व सामर्थ्य के अनुसार दिवंगत की तिथि सहित श्राद्धपक्ष में विधिपूर्वक धूप ध्यान तर्पण पूजन अवश्य करना चाहिए। सर्व पितृ अमावस पर श्राद्ध का विशेष महत्व होता है। पितृदेव के प्रसन्न होने पर देवता भी प्रसन्न होकर शीघ्रातिशीघ्र अनुग्रह कर शुभ आशीष प्रदान करते हैं।

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