- विवाह के कुछ समय बाद संयम मार्ग अपनाया बाद में पत्नी भी संयम पथ की राही बनी
- बहुत ही शान्त स्वभावी व मधुर भाषी थे प्रवर्तक श्री रमेश मुनि जी
- चतुर्थ पुण्य तिथी पर विशेष
- प्रस्तुति : विजय कुमार लोढ़ा निम्बाहेड़ा ( पूणे)


संक्षिप्त जीवन वृत
जैन इतिहास के सुनहरे पृष्ठो का हम अध्ययन करते है तो जम्बु स्वामी के वैराग्य का वर्णन पढ़ने को मिलता है ! कइ बार बहुत सी चारित्र आत्माओ ने जम्बु कुमार के वैराग्य का वर्णन सुन कर संसार से विरक्ति लेली ! उसके बाद भी कई कथानक आदर्श त्याग के पढ़ने को मिलते है ! आचार्य परम धेर्यवान श्री खुब चंद जी म.सा. ने विवाह के कुछ समय बाद ही पत्नी साकर कुंवर का मोह छोड़कर संयम धारण किया बाद में साकर कुंवर जी भी महासती बनी ! जैन दिवाकर गुरुदेव श्री चौथमल जी म.सा को भी विवाह होते ही वैराग्य हुआ उन्होने भी पत्नी मान कुंवर को छोड़ कर संयम लिया व वो भी बाद में महासती बनी! एसे ही प्रवर्तक श्री रमेश मुनि जी को भी उत्कृष्ठ वेराग्य ग्रहस्थ जीवन में नंही रख सका वो सन्त बनगये , पश्चात उनकी पत्नी वीराबाई भी महासती बन गइ जो महासती श्री विजया कुंवर जी के नाम से जानी गई !
प्रवर्तक श्री रमेश मुनि जी का जन्म मजल ( बाड़मेर) में हुआ पिता श्री बस्ती मल जी कोठारी एवम माता श्री आशा बाइ थे आपका जन्म संवत 1988 के मगसर सुदी सप्तमी को हुआ ! आपका जन्म नाम श्री रतन चंद जी था!
आपका विवाह धवा निवासी श्री जस राज जी भुरट की सुपुत्री वीरा बाइ के साथ हुआ जिन्होने बाद में दीक्षा ग्रहण की व महासती श्री विजया कुंवर जी ( जैन दिवाकर गुरुदेव श्री चौथ मल जी म. सा की सुशिष्या परम उपकारी एवम प्रभावी महासती श्री बाल कुंवर जी की सुशिष्या महासती श्री मदन कुंवर जी की सुशिष्या) बनी!
वेराग्य भाव – आपको वेराग्य स्व प्रेरणा तथा महासती श्री बाल कुंवर जी के सद्बोध से आया एवम आपकी दीक्षा 9 मइ 1954 ( वेशाख शुक्ला सप्तमी )को जरिया ( बिहार) में मेवाड भूषण , जैन धर्म सुधाकर पूज्य श्री प्रताप मल जी म.सा के पावन सानिध्य में हुई !
साहित्य लेखन में रुचि – संयम लेने के बाद आपने गुरुदेव के साथ रह कर विशेष ज्ञान अभ्यास किया व सिद्धान्ताचार्य , साहित्य विशारद आदि अध्ययन पूर्ण किया ! आप को प्राकृत , संस्कृत,हिन्दी , कन्नड़ , अंग्रेजी आदि भाषाओं का ज्ञान था!
साहित्य लेखन – साहित्य के क्षेत्र में आपका बड़ा योगदान रहा ! आपने गद्य व पद्य दोनो विधाओं में लिखा ! प्रताप कथा कौमुदी भाग 1 से17 , आचार्य श्री खुब चंद जी म.सा का जीवन चरित्र, सदगुरु नाथ श्री गणेश लाल जी म.सा का जीवन वृत , जैन दिवाकर संस्मरणो के आइने में, भगवान महा वीर के पावन प्रसंग , जीवन आलोक , आदि कई पुस्तके लिखी !
प्रवर्तक पद – आचार्य सम्राट श्री आनन्द ऋषी जी म.सा ने सन1983 में नासिक चातुर्मास में प्रवर्तक पद प्रदान किया गया!
पदविया – विभिन्न संघो द्वारा आपको , प्रज्ञा महर्षि , साहित्य मनिषी, मरुधरा भूषण , महाश्रमण आदि उपाधियो से सम्मानित किया गया !
सरलता व सह्र्दयता सबसे बड़ा गुण
प्रवर्तक जी में सबसे बड़ा गुण जो भी उनके पास जाता उनसे बहुत प्रेम से बोलते , मुख पर सदैव मुस्कान रहती और सबसे बड़ी बात जो कोइ उनकी आलोचना भी करते वै सदैव उनसे प्रेम पूर्वक व्यहवार करते !
दिनांक 16 अक्टुम्बर 2019 को संथारा सहित आपका देवलोक गमन , दलौदा ( म. प्र) में हुआ!
वर्तमान में आपका गुरुभ्राता व शिष्य पारिवार , श्रमण संघीय सलाहकार श्री सुरेश मुनि शास्त्री, प्रवर्तक श्री विजय मुनि जी , उपाध्याय श्री गौतम मुनि जी, श्रमण संघीय मंत्री राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश , उप प्रवर्तक श्री चन्द्रेश मुनि , संस्कार मंच प्रणेता श्री सिद्धार्थ मुनि आदि हे !
एसे महाश्रमण , प्रज्ञा महर्षि , संथारा साधक जैन दिवाकर गुरुदेव पर पूर्ण आस्थावान पूज्य प्रवर्तक श्री रमेश मुनि जी के पावन पुण्य स्मृति दिवस पर हृदय की अनन्त आस्था के साथ कोटिशः वंदन , आप जंहा भी विराज मान हे आपकी कृपा बरसती रहे !
विजय कुमार लोढ़ा निम्बाहेड़ा ( बेंगलोर), प्रताप गुरु ज्ञानालय बड़ी सादड़ी( जिला चितौड़ गढ राज.), जैन दिवाकर आयम्बिल खाता जोधपुर आदि!
देवलोक गमन – कुछ वर्ष आपका स्वास्थ बराबर अस्वस्थ चल रहा था! दिनांक 16 अक्टुम्बर 2019 को संथारा सहित आपका देवलोक गमन , दलौदा ( म. प्र) में हुआ! वर्तमान में आपका गुरुभ्राता व शिष्य पारिवार , श्रमण संघीय सलाहकार श्री सुरेश मुनि शास्त्री, प्रवर्तक श्री विजय मुनि जी , उपाध्याय श्री गौतम मुनि जी, श्रमण संघीय मंत्री राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश , उप प्रवर्तक श्री चन्द्रेश मुनि , संस्कार मंच प्रणेता श्री सिद्धार्थ मुनि आदि हे !
एसे महाश्रमण , प्रज्ञा महर्षि , संथारा साधक जैन दिवाकर गुरुदेव पर पूर्ण आस्थावान, श्रमण संघ व दिवाकर परम्परा के हितेषी सन्त पूज्य प्रवर्तक श्री रमेश मुनि जी के पावन पुण्य स्मृति दिवस पर हृदय की अनन्त आस्था के साथ कोटिशः वंदन , आप जंहा भी विराज मान हे आपकी कृपा बरसती रहे !
विजय कुमार लोढ़ा निम्बाहेड़ा ( पूणे)
उपाध्यक्ष: अ. भा. श्वे. स्थानक वासी जैन कांफ्रेस नइ दिल्ली, ज्ञान प्रकाश योजना!
स्थाइ न्यासी.: अ. भा. श्री जैन दिवाकर संगठन समिती( रजि.)
मंत्री:.श्री जैन दिवाकर साहित्य प्रकाशन समिती( रजि.) चितौड़ गढ़ .( राज.)