ओली जी की आराधना में साधु पद दिवस मनाया

रतलाम, 24 अक्टूबर। आचार्य श्री विजय कुलबोधी म.सा. निश्रा में मंगलवार को सैलाना वालांे की हवेली मोहन टॉकीज में नवपद ओली जी की आराधना में साधुपद दिवस मनाया गया। इस मौेके पर आचार्य श्री ने साधु पद की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि साधु पद की पांच डेफिनेषन है। विराग, विवेक, विचार, विष्वास और विनोद में जिए वह साधु है। आचार्य श्री ने कहा कि साधु होने के लिए जीवन में विराग होना चाहिए। विराग का आशय पदार्थ का त्याग ही नहीं, पदार्थ की पसंद और चयन का त्याग भी होता है। विवेक का मतलब सच क्या है और गलत क्या है यह जानना ही नहीं होता अपितु अच्छा और बुरा क्या होता है यह जानना होता है। महाभारत में सच और गलत के बीच युद्ध हुआ जबकि रामायण में अच्छाई और बुराई आमने-सामने रही है।
आचार्य श्री ने कहा कि विचारों मंे जीने का आशय जो पूरे जीवन ज्ञान और ध्यान की आराधना में लगा रहे, वह साधु ही होता है। विश्वास से हमारा आशय प्रभु एवं गुरू पद पूर्णतयः विश्वास होना है। मेरी समझ शक्ति, ईच्छा शक्ति और निर्णय शक्ति सभी गुरू के अधीन रहे, यह पूर्ण विश्वास है। आचार्य श्री ने कहा कि विनोद में जो जीता है वह साधु होता है क्योकि साधु हमेशा प्रसन्न रहता है। संसार की बातों से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। साधु पद के लिए इन सभी आयामों को छूना आवश्यक है।