जब नहीं सुनाई दे बड़ो की ओर भगवान की आवाज समझ लेना सड़ गए हमारे कान-समकितमुनिजी

  • जीवन में वह भूल कभी मत करना कि भगवान बनने पर भी उसे मिटा न सको
  • आदिनाथ सोसायटी स्थानक प्रांगण में श्रीमद् उत्तराध्ययन आगम की 21 दिवसीय आराधना का आगाज

पूना, 24 अक्टूबर। हमारे जीवन की हर सांस विनयमय होनी चाहिए। अविनय के संस्कारों से हमारी चेतना के मुक्त हुए बिना कर्मों से मुक्ति नहीं मिल सकती है। विनय शून्य जीवन सार्थक नहीं हो सकता। हमारे कान सड़ गए तो मन भी सड़ जाएगा। जब-जब हम अपने आराध्य की मानने से इनकार करने लगे, मनमानी की तरफ आगे बढ़ने लगे तो समझ लेना हमारे कान सड़ गए है। बड़ो की आवाज, गुरू की आवाज व भगवान की आवाज सुनाई देना बंद हो जाए तो पक्का समझ लेना अपने कान सड़ गए है। ये विचार पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने मंगलवार को परमात्मा भगवान महावीर स्वामी की अंतिम देशना श्रीमद् उत्तराध्ययन आगम की 21 दिवसीय आराधना ‘‘आपकी बात आपके साथ’’ का विधिपूर्वक गरिमामय आगाज करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने उत्तराध्ययन सूत्र के प्रथम अध्धयन विनय श्रुत का वाचन करते हुए उसकी मूल गाथा व उनका अर्थ धर्म के सार एवं जीवन के व्यवहारिक दृष्टिकोण के साथ समझाया। मुनिश्री ने कहा कि कान जब सड़ जाते है तो व्यक्ति जो नहीं होता उसे बताने का प्रयास करता है। कान सड़ने पर गुणों से एलर्जी ओर दुर्गुणों से मोहब्बत हो जाती है। शक्ल व दिमाग मानव का मिला है तो अपना मन सुअर का नहीं बनने दे। गुणों से एलर्जी हो गई तो व्यक्ति के कदम दुर्गुणों की तरफ बढ़ेंगे। गुणों व गुणवानों से मोहब्बत करें। उन्होंने कहा कि बड़े हम पर अनुशासन करें तो गुस्सा नहीं होना चाहिए। ऐसे समय में क्षमा धारण करने वाला समझदार होता है। संगत सहीं होगी तो जीवन में रंगत भी सही आएगी। आगम आराधना के दौरान पूज्य मुनिश्री ने वीर प्रभु की स्तुति में भजन ‘प्रभु महावीर का मांगलिक नाम था’ एवं ‘दीप से दीप जले सब अंधकार मिटे’ की प्रस्तुति दी। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना विजयमुनिजी म.सा., गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा., सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। उत्तराध्ययन सूत्र की आराधना अवधि में प्रतिदिन सुबह 8.15 से 9.30 बजे तक इसका वाचन किया जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन निर्धारित समय पर प्रवचन में आने वाले श्रावक-श्राविकाओं को लक्की ड्रॉ के माध्यम से लाभार्थी परिवारों द्वारा एक-एक चांदी के सिक्के की प्रभावना दी जाएगी। पहले दिन की आराधना का लाभ दीपचंदजी, सुदर्शनाजी, सुनीलजी, राजश्रीजी पारख एवं परिवार तथा मेरठ से पधारे कुणालजी जैन, कृतिका जैन एवं परिवार ने लिया। लाभार्थी परिवारों के धर्म का टीका अगले दिन की आराधना के लाभार्थी भरतजी चंधेड़ी परिवार ने किया। धर्मसभा का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। कई श्रावक-श्राविकाओं ने आयम्बिल, एकासन आदि तप के प्रत्याख्यान भी लिए। धर्मसभा में पूना व आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में मौजूद थे।
गलती को स्वीकार नहीं करने पर खुल जाते बर्बादी के दरवाजे
आगमज्ञाता समकितमुनिजी ने कहा कि जिंदगी में स्वयं को बर्बादी से बचाना है तो गलती हो जाने पर उसे छुपाने का प्रयास नहीं करे। गलती स्वीकार करने पर बर्बादी के दरवाजे बंद हो जाते है। इसके विपरीत गलती को स्वीकार नहीं करने पर बर्बादी के दरवाजे ओर खिड़कियां दोनों खुले रहते है। गलती को छुपाने के प्रयास में कई बार कदम आत्महत्या तक पहुंच जाते है। गलत कदम उठ गया तो उसे अपने प्रियजन को बता देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम शांत को गुस्सैल ओर गुस्सैल को शांत बना सकते है। घर में कोई सदस्य आग बन रहा हो तो उस समय पेट्रोल बनने पर आग अधिक भड़क जाएगी। इसकी बजाय पानी बन गए तो भड़क रही आग भी शांत हो जाएगी। गुस्से को असत्य करने पर क्रोध को हरा देंगे। क्रोध को हराने पर क्षमा जीत जाएगी। मुनिश्री ने कहा कि मन अपना राजा ओर इन्द्रिया प्रजा है। प्रजा को राजा का कहना मानना पड़ता है पर प्रजा एक हो जाए तो राजा को भी झुकना पड़ता है।
जिनकी सुननी चाहिए उनको सुनाने पर जीवन सूना हो जाता है
प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी ने कहा कि जीवन में वह भूल कभी नहीं करना कि भगवान बन जाओ तो भी उसे मिटा नहीं पाओ। हम अपने लाभ व स्वार्थ के लिए लोगों को गलत मार्ग से जोड़ने का प्रयास नहीं करे। जीवन में अपने स्वार्थ के लिए लोगों को आपस में लड़ाने की भूल कभी मत करना। जीवन में जो गुरू की आवाज सुनता है उसे आशीर्वाद मिलता है। उन्होंने कहा कि बड़ा आशीर्वाद चाहिए तो घर के अंदर बड़ो की सुनते रहो। जिनकी सुननी चाहिए उनको सुनाना शुरू कर दिया तो जीवन सूना-सूना हो जाएगा। बड़ो की आवाज को नजरअंदाज मत करो। किसी के बारे में जानकारी लेनी है तो उसके समीप जाकर लो। दूसरों से गलत जानकारी मिलने पर रिश्ते खराब हो सकते है। जिनके साथ समस्या उनके साथ बैठकर बात करो अन्यथा लोगों को बाते बनाने का मौका मिलेगा।
अंतिम देशना को समर्पित धर्मगीत का विमोचन
उत्तराध्ययन सूत्र आराधना के पहले दिन पूज्य समकितमुनिजी म.सा. के सानिध्य में उभरते प्रतिभावान गायक सुमित संचेती द्वारा प्रभु महावीर की अंतिम देशना को समर्पित धर्मगीत का विमोचन किया गया। धर्मगीत ‘भगवंत महिमा में गाउ तेरी अमृतमय अंतिमवाणी तेरी’ को पांडाल में सुनाया भी गया। इस धर्मगीत का प्रायोजक प्रकाशचंदजी, रूपचंदजी नाहर परिवार रहा। समकितमुनिजी ने गीत की सराहना करते हुए गायक सुमित संचेती के लिए हार्दिक मंगलभावनाएं व्यक्त की। गौरतलब है कि सुमित ने इस चातुर्मास में प्रवचनमाला कहानी द्रोपदी की एवं कथा चेलना रानी की के टाइटल सांग एवं पर्युषण पर्व के उपलक्ष्य में भी गीत तैयार किया था। उक्त जानकारी सचिन रमेशचन्द्रजी टाटिया अध्यक्ष, आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट, पूणे तथा निलेश कांठेड़ मीडिया समन्वयक, समकित की यात्रा ने दी।

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