- आदर नहीं करने वाले समाधान देने पर भी बनेंगे समस्या का कारण
- आदिनाथ सोसायटी स्थानक प्रांगण में श्रीमद् उत्तराध्ययन आगम की आराधना जारी

पूना, 25 अक्टूबर। जीवन में हमारी दृष्टि पाप की नहीं होनी चाहिए जिसमें हमेशा खुद सही ओर दूसरा गलत ही लगता है। जन्मांध को भी ये बात समझ में आ जाती लेकिन अपने को ये बात समझ में नहीं आने से ही जीवन में क्लेश व तनाव होते है। हमारी दृष्टि एकान्तवादी होने की बजाय समन्वयवादी होनी चाहिए जिसमें ये माना जाए कि मैं भी गलत नहीं लेकिन सामने वाला जो कह रहा वह भी गलत नहीं है। हमारी स्वयं को सही व सामने वाले को गलत मानने वाली दृष्टि के कारण संघ-समाज, परिवार में झगड़े व कलह खत्म नहीं होते है। ये विचार पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने बुधवार को परमात्मा भगवान महावीर स्वामी की अंतिम देशना श्रीमद् उत्तराध्ययन आगम की 21 दिवसीय आराधना ‘‘आपकी बात आपके साथ’’ के तहत प्रथम अध्धयन विनय श्रुत का वाचन करते पूर्ण करते हुए व्यक्त किए। इस दौरान उसकी विभिन्न मूल गाथा उनका अर्थ के साथ समझाई गई। मुनिश्री ने कहा कि मां हमे जन्म देकर संसार में धकेल देती है ओर जिनवाणी संसार सागर से पार कराती है। जब तक खाने के लिए रोटी मिलेगी तब तक जिनवाणी सुनने को मिलेगी। जिनवाणी सुनते रहे तो शायद छठे आरे के दुःख भोगने से बच जाएंगे। तीर्थंकर नहीं होने के बावजूद उनकी वाणी सुनने को मिल रही है तो हम स्वयं को सौभाग्यशाली माने। इसके बावजूद हम प्रमाद में रह जाते है तो कोई कुछ नहीं कर सकता। उन्होंने विनय गुण की चर्चा करते हुए कहा कि जो विनय से सम्मान देते हुए पूछे उसे ही समाधान देना चाहिए। जो ऐसा नहीं करते उनको हम भले कितना भी समाधान दे वह हमारे लिए समस्या का कारण ही बनेंगे। हमे उनका आदर करना चाहिए जो अनुशासित रखते ओर गलत कार्य करने से टोकते है। यह मानकर चले कि कई बार अच्छी बात भी सामने वाले को गलत लग सकती है। भला करने पर भी सामने वाला दुश्मन बन सकता है। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना विजयमुनिजी म.सा., गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा., सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। दूसरे दिन की आराधना का लाभ भरतजी, रोहितजी, नीलम जी चंगेड़ी परिवार ने लिया। लाभार्थी परिवार के धर्म का टीका अगले दिन की आराधना के लाभार्थी रविन्द्रजी, आनंदजी नाहर परिवार एवं केवलचंदजी, सुनीलजी नाहर परिवार ने किया। धर्मसभा में दिल्ली से पधारे गुरूभक्त सुश्रावक नरेशजी जैन का स्वागत श्री आदिनाथ संघ द्वारा किया गया। धर्मसभा का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। कई श्रावक-श्राविकाओं ने आयम्बिल, एकासन आदि तप के प्रत्याख्यान भी लिए। धर्मसभा में पूना व आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में मौजूद थे। उत्तराध्ययन सूत्र की आराधना अवधि में प्रतिदिन सुबह 8.15 से 9.30 बजे तक इसका वाचन किया जाएगा।
जिंदगी में कभी नहीं बने अड़ियल घोड़े जैसे
समकितमुनिजी ने कहा कि जिंदगी में हमारा स्वभाव कभी अड़ियल घोड़े जैसा नहीं होकर उस चेतक घोड़े के समान होना चाहिए जो अपने मालिक की समस्या को पहचान सके। बहुत सी संताने अड़ियल घोड़े की तरह उग्र तेवर वाली होकर माता-पिता का जीना मुश्किल कर देती है। बच्चें चाहे जितनी नाराजगी जताए पर कभी अपने माता-पिता को तेवर नहीं दिखाए। उनकी चार बाते सुन लेने से बच्चों की उम्र कम नहीं हो जाएगी। हमेशा याद रखना उम्र तुम्हारी भी जाएगी, जवानी तुम्हारी भी जाएगी जो कर रहे आज बेशर्मी देख लेना आगे की सारी जिंदगी पछतावे में जाएगी।
गुस्सा शांत करने के लिए बोल विश्वास जगाने वाली विनयवाणी
प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी ने कहा कि जिंदगी में किसी का जासूस नहीं बनना चाहिए। हम दूसरों की जिंदगी में ताका-झांकी नहीं करेंगे तो न स्वयं क्रोधित होंगे न दूसरों को क्रोधित करेंगे। सामने वाले का गुस्सा शांत करने के लिए विश्वास जगाने वाली विनयवाणी का उपयोग करना चाहिए। गलती हो जाए तो गुस्सा करने की बजाय भरोसा दिलाए कि आगे ऐसा नहीं होगा। जीवन में बिना प्रेरणा भी कार्य करना सीखना होगा। जब हमे महसूस हो काम करने की जरूरत है तब बिना किसी प्रेरणा के भी उसे करना चाहिए।
उक्त जानकारी सचिन रमेशचन्द्रजी टाटिया अध्यक्ष, आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट, पूणे तथा निलेश कांठेड़ मीडिया समन्वयक, समकित की यात्रा-2023 ने दी।