अपने प्रबल पुरुषार्थ से ज्ञान अर्जन कर एक महान जेन सन्त बने, आध्यात्म योगी, प्रवचन कार एवम सुलेखक थे उपाध्याय श्री पुष्कर मुनि जी

प्रस्तुति: विजय कुमार लोढ़ा निम्बाहेड़ा( पूणे)
संक्षिप्त जीवन-वृत

उपाध्याय श्री पुष्कर मुनि जी का जन्म संवत 1967 की आसोज सुदी चौदस को उनके ननिहाल नान्देशमा ग्राम में हुआ! आप ब्राहमण ( पालीवाल ) समाज से थे! आपके पिताजी का नाम सुरज मल जी तथा माता का नाम बालीबाई था आप सीमटाल( उदयपुर) के रहने वाले थे! नो वर्ष की उम्र में आपकी माता जी का निधन होगया! वैराग्य अंकुरण हुआ! संवत 1981 की जेठ सुदी दसम को आपकी दीक्षा प्रमुख जैन सन्त श्री तारा चंद जी महाराज के पास हुई!
ज्ञान अर्जन करने में प्रबल पुरुषार्थ
गुरु जी के सानिध्य में प्राकृत , संस्कृत, भाषा व आगम का गहन अध्ययन किया! प्रमुख वक्ता व लेखक रहे! बहुत साहित्य लिखा! आप ने आगम का विशेष रूप से अध्ययन किया, आपका लक्ष्य स्वयम अध्ययन का रहा तथा जो भी आपके पास आते उनको भी इस बात की प्रेरणा देते कि अधिक से अधिक ज्ञान वान बनो!
श्रमण संघ निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका
विक्रम संवत 2009 में सादड़ी मारवाड़ में जो वृहद साधु सम्मेलन हुआ। उसमें अपने सम्प्रदाय की तरफ से विचार प्रकट करने में आपकी प्रमुख भूमिका रही, उस समय आप की उम्र ज्यादा नही थी पर आपके संगठन संचालन हेतु सुजाव से सभी सन्त प्रभावित हुए, एवम आप उस सम्मेलन में शिक्षा मंत्री बनाए गये! सन 1964 में अजमेर साघु सम्मेलन जंहा आचार्य श्री आनन्दऋषी जी म.सा का आचार्य चादर महोत्सव हुआा था उसमें भी आपकी मुख्य भूमिका रही, और आपका सदा यह प्रयास रहा कि श्रमण संघ मजबूत बने!
उपाध्याय – पद
सन 1976 की संवस्तरी के दिन आपको आचार्य श्री आनन्द ऋषी जी म.सा. ने उपाध्याय पद प्रदान किया! उस समय आपका चातुर्मास रायचूर( कर्नाटक) में था!
आपके 74 वें जन्म दिवस पर तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने विश्व सन्त की उपाधी प्रदान की! आपके प्रमुख शिष्यो में आचार्य श्री देवेन्द्र मुनि एवम गणेश मुनि शास्त्री! हीराचंद जी म. सा तथा वर्तमान में आपके शिष्य प्रशिष्य में उपाध्याय रमेश मुनि प्रवर्तक राजेन्द्र मुनि, सलाहकार दिनेश मुनि, उप प्रवर्तक नरेश मुनि आदि हैं!
जब आचार्य श्री देवेन्द्र मुनि का आचार्य चादर महोत्सव 28 मार्च 93 को उदयपुर में होने वाला था! आपका स्वास्थ एक दम नरम होगया ! महोत्सव तो सानन्द सम्पन्न हो गया पर बादमें 3 अप्रेल 93 को आप का संथारा सलेखना सहित देवलोक गमन होगया! अन्तिम समय में आपनी सेवा का पुरा लाभ जैन दिवाकर श्री चौथमल जी म.सा. के अन्तेवासी सुशिष्य तपस्वी श्री मोहन मुनि जी काले डण्डे वाले ने लिया ! उन्होने कहा कि आचार्य श्री जी आपका चादर महोत्सव आराम से सम्पन्न हो जाएगा ! वो हर समय सेवा में रहे!
अध्यात्म – योगी
आप अच्छे वक्ता , कुशल लेखक, व श्रमण संघ संचालन में मुख्य भूमिका निभाने वाले प्रमुख सन्तो में से एक आदर्श सन्त थे, पर साथ ही ध्यान- योग से आप विशेष साधना में रत रहते, जिन्होने आपके दर्शन किये उन्हे मालूम हें कि एक घन्टे की साधना के बाद जो दोपहर की जो उनकी विशेष मांगलिक होती, वंहा भारी उपस्थिती रहती, तथा बहुत प्रभावी होती, जिसके कई संस्मरण हे! एसे महान सन्त के पावन जन्म जयन्ती प्रसंग पर कोटिशः वंदन! आपकी कृपा बनी रहे!
विजय कुमार लोढ़ा निम्बाहेड़ा( पूणे)
उपाध्यक्ष: अ. भा. श्वे. स्था. जैन कांफ्रेस नइ दिल्ली ज्ञान प्रकाश योजना
स्थाई न्यासी : अ. भा. श्री जैन दिवाकर संगठन समिती रजि.
मंत्री:श्री जैन दिवाकर साहित्य प्रकाशन समिती रजि.

नोट- पुज्य श्रंमण संघीय उपाध्याय भगवत आचार्य पुज्य श्री द्वेवेन्द मुनिजी के उपाचार्य की घोषणा नई दिल्ली के वीर नगर जैन कालौनी के चातुर्मास दौरान होकर बहुत चर्चा होती है, साथ गुरु वशिष्ठ के जब में पत्रकारिता मे भी सक्रिय रहकर कार्य से समाज संस्था और मे सक्रिय देशभर मे भ्रमण करता था तब मुझे दोनों गुरुभक्तों का आशीर्वाद मिला है। बाद मे रतलाम मे आचार्य देवेन्दमुनिजी के आशीर्वाद व् मार्गदर्शन में वर्ष 1997 मे राष्ट्र संत कमल मुनिजी का रतलाम नीम चौक संघ को मिला था जो ऐतिहासिक यादगार रहा – मोतीलाल बाफना, रतलाम

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