- भगवान महावीर का धर्म संर्कीण सोच वालों के लिए नहीं, सबको सिद्ध बनने का अधिकार
- भगवान महावीर निर्वाण कल्याणक पर 21 दिवसीय श्रीमद् उत्तराध्ययन आगम आराधना का समापन

पूना, 13 नवम्बर। परमात्मा प्रभु महावीर पल भर में संयोगी (13वे गुणस्थान) से अयोगी (14वें गुणस्थान में) हो गए ओर उनकी आत्मा सिद्धशिला में जाकर विराजमान हो गई। जाने से पूर्व प्रभु महावीर पावापुरी अपापानगरी में अंतिम देशना के माध्यम से हमे अनमोल ज्ञान प्रदान करने के साथ राजा हस्तिपाल को आए आठ स्वप्नों का अर्थ बता भविष्य में क्या होने वाला है यह भी बता गए। भगवान महावीर ने सम्यक पुरूषार्थ एवं पराक्रम कर परमात्मा बनने का अधिकार सबको दिया है एवं उनका धर्म संर्कीण सोच वालों के लिए नहीं हो सकता। हमारा लक्ष्य परमात्मा महावीर की वाणी व आदर्शो को आत्मसात करते हुए सिद्ध बन शाश्वत सुखों की प्राप्ति का होना चाहिए।ये विचार पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने सोमवार को परमात्मा भगवान महावीर स्वामी निर्वाण कल्याणक महोत्सव के अवसर पर धर्मसभा में व्यक्त किए। इस अवसर पर परमात्मा महावीर की अंतिम देशना श्रीमद् उत्तराध्ययन आगम की 21 दिवसीय आराधना ‘‘आपकी बात आपके साथ’’ का समापन अंतिम 36वें अध्याय जीवाजीव विभक्ति का वाचन करते हुए हुआ। इस दौरान इस अध्याय की मूल गाथा का वाचन करने के साथ उनके अर्थ भी समझाया गया। उन्होंने कहा कि परमात्मा महावीर ने राजा हस्तिपाल को दिखे आठ स्पप्न का अर्थ बताते हुए कहा कि हाथी देखने का मतलब है आने वाले समय में श्रावक हाथी की तरह मदोन्मत होकर अभिमान में रहेंगे। बंदर का मतलब है धर्मसंघ का एक ठिकाने पर मन नहीं लगेगा ओर प्रमादी एवं चंचल होता जाएगा। क्षीरतरू का अर्थ श्रावक एवं संतों में मिलीभगत होगी। कोंए का अर्थ लोग अपने-अपने सम्प्रदाय एवं पंथ को लेकर ही बोलते रहेंगे। कमजोर सिंह का अर्थ हुआ धीरे-धीरे धर्म में गिरावट आकर कमजोर होगा। कमल के फूल का मतलब अच्छे व्यक्ति भी गलत सन्मार्ग पर आगे बढ़ जाएगा। बीज का अर्थ हुआ गलत जगह धर्म करके समझेंगे कि फल मिलने वाला लेकिन मिलेगा नहीं। आठवे स्वप्न खाली घड़े का अर्थ बताया लोग बाहर से टिपटॉप लेकिन अंदर से खोखले होंगे। मुनिश्री ने परमात्मा महावीर के जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि वह 30 वर्ष की उम्र में योगी बने और साढ़े बाहर वर्ष की साधना से साढ़े 42 वर्ष की उम्र में 13वें गुणस्थान में जाकर संयोगी केवली बने। योगी बनना आसान लेकिन संयोगी बनना कठिन होता है। उन्हें 85 कर्म प्रकृतियों का नाश करके संयोगी से योगी (सिद्ध दशा) बनने में 30 वर्ष का समय लग गया। समकितमुनिजी ने श्रावक-श्राविकाओं को आंखें बंद कराके संयोगी से अयोगी बनने की प्रक्रिया की अनुभूति कराने का प्रयास किया। अंतिम देशना पूर्ण होेने के बाद अर्न्तमुर्हुत में 48 मिनट के अंदर प्रभु का निर्वाण होगा। गुणस्थान के अंत में योग निरोग की प्रक्रिया शुरू होती है। प्रभु की दिव्य ध्वनि थमते ही समोवशरण में अंधेरा छा जाता है। प्रभु महावीर की आत्मा सिद्धशिला में जाकर विराजित होती है एवं उनके जयकारे गूंजने लगते है। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना विजयमुनिजी म.सा., गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा.सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। उत्तराध्ययन सूत्र की 21 दिवसीय आराधना के अंतिम दिन की आराधना का लाभ पुष्पा सुरेशजी सोलंकी, दीपचंदजी सुनीलजी पारख, पायल आदित्यजी नाहर, पद्माजी समीरजी बांठिया, राहुलजी तेजस देसाई, ऋषभजी प्रमोदजी संचेती, मोहनलालजी मंगलाजी कोठारी, उज्जवला सतीश गांधी, कल्पना शैलेषजी मेहता, किरण संतोषजी भंसाली, राजेन्द्र कमलाबाई लुंकड़ परिवार ने प्राप्त किया। प्रत्येक लाभार्थी परिवार द्वारा एक श्रावक एवं एक श्राविका को लक्की ड्रॉ के माध्यम से चांदी का सिक्का प्रदान किया गया। धर्मसभा का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने करते हुए सभी श्रावक-श्राविकाओं को भगवान महावीर निर्वाण कल्याणक एवं दीपावली पर्व की बधाई एवं मंगलकामनाएं प्रदान की। धर्मसभा में पूना व आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में मौजूद थे।
जो जीव अजीव को अलग कर दे वह संसारी हो जाता है
धर्मसभा में समकितमुनिजी ने उत्तराध्ययन सूत्र के अंतिम अध्याय जीवाजीव विभक्ति का वाचन करते हुए कहा कि इस अध्ययन में समझाया गया है कि जो जीव अजीव की भक्ति करे वह संसारी होता है ओर जो जीव अजीव को अलग कर दे वह सिद्ध हो जाता है। जीव अनादिकाल से जड़ की भक्ति कर रहा है उसे करना छोड़ दे तो वह सिद्धात्मा हो सकता है।
गौतम स्वामी केवल्य ज्ञान दिवस कल मनाया जाएगा
चातुर्मास के तहत मंगलवार 14 नवम्बर को पूज्य समकितमुनिजी म.सा. के सानिध्य में गौतम स्वामी केवल्य ज्ञान दिवस (गौतम प्रतिपदा) मनाया जाएगा। सुबह 8.15 बजे से प्रवचन के बाद 9.30 बजे नववर्ष (गुडीपावड़ा) की महामांगलिक दी जाएगी। प्रवचन में गौतम की कहानी गौतम की जुबानी सुनाई जाएगी। प्रभु महावीर ने जो गौतम स्वामी सारी उम्र उनके पास रहे उन्हें जीवन के अंतिम क्षणों में देव शर्मा को प्रतिबोध देने के लिए भेज दिया था। गौतम स्वामी महातपस्वी होने के साथ 14 पूर्वो के ज्ञाता एवं चार ज्ञान के धारक थे। उनका नाम इन्द्रभूति एवं गौत्र गौतम थी। उन्होंने 50 वर्ष की उम्र में संयम लिया एवं 30 वर्ष तक साधना कर कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया। केवली पर्याय में 12 वर्ष तक रहकर 92 वर्ष की उम्र में सिद्ध पद को पाया।
चौमुखी जाप के मांगलिक कलश की स्थापना 20 को
चातुर्मास में 78 दिन तक चले सर्वोतभद्री चौमुखी जाप के दौराना चारों दिशाओं में रखे गए कलश की स्थापना 20 नवम्बर को सुश्रावक दीपकजी लुंकड़ के निवास पर की जाएगी। इस अवसर पर सुबह 7.30 बजे आदिनाथ स्थानक भवन से पूज्य समकितमुनिजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में वरघोड़ा निकाल विधिपूर्वक कलश लुंकड़ निवास तक पहुंचाए जांएगे। उस दिन समकितमुनिजी म.सा. का प्रवचन वहीं पर होगा। श्री दीपक लुंकड़ एवं सौ. प्राची लुंकड़ ने शनिवार को धर्मसभा में सभी श्रावक-श्राविकाओं को कलश स्थापना आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। चातुर्मासिक आयोजन के तहत 19 नवम्बर को वाचनाचार्य उपाध्याय प्रवर श्री विशालमुनिजी म.सा. का जन्मदिन एकासन दिवस के रूप में मनाया जाएगा। चातुर्मास में 21 से 25 नवम्बर तक कृष्ण-सुदामा कथानक पर विशेष प्रवचनमाला होगी।