जावरा (अभय सुराणा) । दिवाकर भवन पर मेवाड़ गौरव प्रखर वक्ता प्रवचनकार श्री रविन्द्र मुनि जी म.सा.नीरज ने गुरु सप्ताह अंतर्गत धर्मसभा को संबोधित करते हुए फ़रमाया की चित्त में स्थिरता नहीं आती तब तक समधिभाव जीवन में नहीं आ सकता। मन की स्थिरता को साधना हर किसी के बस की बात नहीं यह मन बड़ा चंचल स्वभाव वाला, बड़ा दृढ़ और बलवान है। इसलिए उसको वश में करना मैं वायु को रोकने की भाँति अत्यन्त दुष्कर है समभाव का अर्थ है ऐसा भाव जिसके विपरीत ना जाना पड़े। कोई ऐसा भाव जो इतना आकर्षक हो इतना विराट हो कि तुम्हें पूरा ही सोख ले अपने में। तुम्हें उससे हटकर के किसी और भाव की ज़रूरत ना पड़े।समभाव का अर्थ यही नहीं होता कि दुःख-सुख एक समान सर्दी-गर्मी एक समान धूप-छाँव एक समान। समभाव का अर्थ है- मन पर कुछ ऐसा छाया हुआ है जिसकी पनाह में आने के बाद अब और कहीं जाने की ज़रूरत नहीं लगती। समता मिल गई है। अब ना विषमता बची है ना ममता बची है ना अहमता बची है। यह जीवन जीने के तरीके हैं। यह जीवन जीने की कलाएँ हैं और साथ-ही-साथ जीवन कैसा बीत रहा है यह उसकी कसौटी है। इसलिए सामायिक के महत्व को बताया गया है सामायिक में समभाव रखने वाला ही समाधी में स्थिर बन सकता है ऐसे ही समभाव में रहने वाले महान संत करुणा के सागर गरीबो के मसीहा जावरा के गौरव ज्योतिषाचार्य उपाध्याय प्रवर पूज्य गुरुदेव कस्तूरचंद जी म.सा.जिनका जन्म जावरा की पावन पुण्य धरा पर हुआ ऐसे संत की ११८ वी दीक्षा जयंती मनाने का अवसर हमें मिला है आपकी दीक्षा मात्र १४ वर्ष की अल्पायु में रामपुरा में हुई आचार्य सम्राट आनंद ऋषि जी म.सा. ने आपको श्रमण संघ का उपाध्याय पद प्रदान किया था आपका समाधी मरण रतलाम की पूण्य धरा पर हुआ उपरोक्त जानकारी श्री संघ अध्यक्ष इन्दरमल टुकडिया एवम कार्यवाहक अध्यक्ष ओम जी श्रीमाल ने बताया की दिनाक २५ नवम्बर को जैन दिवाकर श्री चौथमल जी म.सा.की १४६ वी जन्म जयंती प्रात: 08:30 बजे जाप एवम गुणानुवाद सभा के रूप में रविन्द्र मुनि म.सा.के सानिध्य में मनाई जाएगी जाप के लाभार्थी सुजानमल जी सोभागमल जी ओरा है श्री संघ द्वारा गौतम प्रसादी का आयोजन प्रात: 11:30 पर सोमवारिया स्थित सागर साधना भवन पर रखा गया है स्वामी वात्सल्य के नखरे के लाभार्थी श्रीमति मोहनबाई पुखराजमलजी राकेशजी राजेशजी कोचट्टा परिवार रहेगे कस्तूरचंद जी म.सा.की ११८ वी दीक्षा जयंती के जाप के लाभार्थी मांगीलाल जी मांगीबाई जी श्रीश्रीमाल,बसंतीलालजी रुपेशजी चपडोद,एवम गुप्त महानुभाव रहे धर्मं सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया