


रतलाम । पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के अंतर्गत लगभग 133 किलोमीटर लंबे नीमच–रतलाम रेल खंड के दोहरीकरण का कार्य तेज गति से प्रगति पर है। इस परियोजना के तहत 31 मार्च 2026 को रतलाम–धौसवास रेल खंड का रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा निरीक्षण एवं गति परीक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया।
पश्चिम परिमंडल के रेल संरक्षा आयुक्त श्री ई. श्रीनिवास ने 31 मार्च 2026 को रतलाम–धौसवास रेल खंड का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नवीन दोहरीकृत रेल लाइन के अंतर्गत निर्मित पुलों, ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई), रेलवे ट्रैक, सिग्नलिंग व्यवस्था तथा अन्य सभी संरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया।
इसके पश्चात 31 मार्च 2026 को इस नवीन दोहरीकृत खंड पर निरीक्षण यान को लगभग 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलाकर ट्रैक की गुणवत्ता और संरक्षा मानकों की जांच की गई। निरीक्षण एवं गति परीक्षण संतोषजनक पाए जाने के उपरांत रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा रतलाम–धौसवास रेल खंड पर यात्री एवं मालगाड़ियों के संचालन के लिए उपयुक्तता प्रमाणपत्र जारी किया गया।
रतलाम–धौसवास रेल खंड लगभग 1.9 किलोमीटर लंबे दोहरीकृत ट्रैक को ट्रेन संचालन की अनुमति मिलने के साथ ही नीमच–रतलाम दोहरीकरण परियोजना का लगभग कार्य पूर्ण हो चुका है। कुल 133 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड में से अब तक लगभग 117 किलोमीटर रेल लाइन का दोहरीकरण पूरा किया जा चुका है और हम नीमच-रतलाम देाहरीकरण के अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुके हैं।
इस परियोजना के शेष हिस्सों अर्थात मंदसौर–दलौदा रेल खंड पर कार्य तीव्र गति से जारी है। रेलवे प्रशासन द्वारा इन शेष खंडों के दोहरीकरण कार्य को भी शीघ्र पूर्ण कर ट्रेन संचालन के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है।