शुभम रेसिडेंसी, तेजा नगर में हुए विशेष प्रवचन


रतलाम, 24 नवंबर। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में शुक्रवार को शुभम रेसिडेंसी, तेजा नगर में प्रवचन हुए। “यात्रा गति से दिशा की ओर “विषय पर विशेष प्रवचन देते हुए आचार्य श्री ने चार गति और चार दिशा की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पैसा, प्रशंसा, प्रसिद्धि और पुरस्कार को गति तो प्रेम, प्रसन्नता, परमार्थ और पवित्रता को दिशा बताया।
आचार्य श्री ने कहा कि विज्ञान ने हमें स्पीड तो दे दी, लेकिन दिशा नहीं दी, यदि हम गलत जाएंगे तो मंजिल नहीं मिलेगी। जीवन में पहले दिशा होना चाहिए और फिर गति। इसलिए यदि प्रभु से कुछ मांगना हो, तो दिशा को मांगों, क्योकि यदि सही दिशा मिल गई तो गति भी मिल जाएगी।
आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में पैसे के साथ प्रेम भी होना चाहिए, लेकिन वर्तमान दौर में पैसा बढ़ने के साथ जीवन में प्रेम घट रहा है , जो सोचने की बात है। पैसा गति है तो प्रेम दिशा है। सत्कार्य करते रहना चाहिए और यह करने के बाद जब किसी को बोलने का मन हो,तब समझ लेना कि आपको सत्कार्य में नहीं प्रशंसा में रस है। हमारे जीवन में सदैव पवित्रता होना चाहिए, पुरस्कार की चाह नहीं।
आचार्य श्री ने कहा कि विदेशी संस्कृति में दो शब्द है, पहला लर्निंग और दूसरा अर्निंग जबकि भारतीय संस्कृति में इन दो शब्दों के अलावा तीसरा शब्द लिविंग भी है। हमारे जीवन में गति तो है लेकिन दिशा का कोई पता नहीं है। प्रभु ने जो जीवन दिया है, उसमें परमार्थ करना चाहिए।इससे जीवन सार्थक हो जाएगा।
25 नवंबर को आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा.के शुभम रेसिडेंसी तेजा नगर में “यात्रा शुद्धि से सिद्धि की ओर” विषय पर प्रवचन होंगे। प्रवचन का समय प्रातः 9 से 10.15 बजे तक रहेगा ।