देखों हमारे आसपास कोई ‘सुदामा’ तो नहीं, बन जाओ उसके कृष्ण असीम आनंद आएगा-समकितमुनिजी म.सा.

  • हर किसी को जिंदगी देती कृष्ण बनने का मौका, अवसर मिले तो कभी मत चूकना
  • आदिनाथ सोसायटी स्थानक प्रांगण में कृष्ण-सुदामा कथानक पर विशेष प्रवचनमाला सम्पन्न

पूना, 25 नवम्बर। ये जिंदगी हर किसी को सुदामा के लिए कृष्ण बनने का मौका देती है, यदि ऐसा अवसर मिले तो कभी मत चूकाना। हो सकता आपके आसपास, रिश्तेदारी, परिवार या समाज में ही कोई सुदामा दिख जाए। ऐसे समय किसी सुदामा के कृष्ण बन जाना। जिंदगी में संकल्प ले एक बार कृष्ण जरूर बन किसी सुदामा को गले लगाएंगे। इतने आनंद की अनुभूति होंगी की उसे शब्दों में बयां भी नहीं किया जा सकता। यह भी ध्यान रहे कृष्ण ने सुदामा को महसूस भी नहीं होने दिया मैने तुम्हारे लिए क्या किया है। हम भी वैसा ही कृष्ण बनना है कि कार्य होने के बाद सुदामा को पता लगे कि मेरे लिए कृष्ण ने क्या किया है। ये विचार पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने शनिवार को कृष्ण-सुुदामा कथानक पर पांच दिवसीय विशेष प्रवचनमाला के अंतिम दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने सुदामा से चावल की पोटली लेकर दो मुट्ठी चावल खा लिए पर प्रत्यक्ष कुछ नहीं दिया तो सुदामा वहां से विदा लेकर जब घर लौट रहा था तो मार्ग में यहीं सोचता रहा कि मेरे मित्र ने मेरी करूण दशा देखी ओर पूछता भी रहा कोई जरूरत तो नहीं लेकिन दिया कुछ नहीं। जब अपने नगर में लौटता है तो अपनी झोपड़ी तलाशता है ओर वहां महल देख उसमे से बुला रही अपनी पत्नी को भी नहीं पहचान पाता है। उसे इतना वैभव सम्पन्नता श्रीकृष्ण प्रदान कर देते है कि सुदामा को विश्वास ही नहीं होता। मुनिश्री ने श्रावकों को प्रेरणा देते हुए कहा कि प्रभु कृपा से कृष्ण बने है, राजा या सेठ बने है तो किसी सुदामा को भी अवश्य अपने जैसा बना देना। उससे जो संतुष्टि व सुकुन प्राप्त होंगा वह कुछ खरीद कर भी नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि कृष्ण-सुदामा कथानक बताता है कि जीवन में कुछ जीतने के लिए कुछ हारना भी पड़ता है। जो जीतने के लिए हारना सीख जाता है उसे जो संतुष्टि मिलेगी वह कमाने पर भी प्राप्त नहीं होेगी। धर्मसभा में गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने भजन ‘‘संयम पथ मिला की मेरे रोम खिल गए’’ की प्रस्तुति दी। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना विजयमुनिजी म.सा., सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। सुश्रावक वर्धमान कोठारी, राजेन्द्र लुंकड़ आदि ने भी विचार व्यक्त किए। धर्मसभा में पूना व आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में मौजूद थे।
नवकार मंत्र जाप कर पूज्य सुमतिप्रकाशजी म.सा. के उत्तम स्वास्थ्य की कामना
धर्मसभा में समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि आराध्य गुरूदेव राजर्षि भीष्म पितामह सुमतिप्रकाशजी म.सा. का स्वास्थ्य पिछले कुछ दिनों से नरम चल रहा है। उन्हें पिछले तीन-चार दिन मेरठ चिकित्सालय में भी भर्ती कराया गया था। उन्होंने कहा कि गुरूदेव के असाता वेदनीय कर्म का उदय है उसे हम कम नहीं कर सकते पर परमात्मा से नवकार मंत्र जाप के माध्यम से इतनी मंगलकामना तो कर ही सकते है कि उनके भाव समाधि एवं साता बनी रहे। मुनिश्री ने पूज्य गुरूदेव के सुखसाता बने रहने की मंगलकामना के साथ धर्मसभा में कुछ मिनट नवकार महामंत्र का जाप कराया। उन्होंने कहा कि सभी श्रावक-श्राविकाएं शनिवार को कम से कम 27 बार नवकार महामंत्र का जाप कर पूज्य गुरूदेव के साता बनी रहे इसकी मंगलकामना करें।
कल चौमासी पक्खी की आराधना, श्रीसंघ मनाएगा कृतज्ञता दिवस
पूज्य समकितमुनिजी ने बताया कि रविवार को चौमासी पक्खी होने से सभी श्रावक-श्राविकाएं तप, त्याग करने का प्रयास करें। आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया के अनुसार आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि पूज्य समकितमुनिजी म.सा. आदि ठाणा के पांच माह के सफल एतिहासिक चातुर्मास के अंत में रविवार एवं सोमवार को कृतज्ञता दिवस मनाया जाएगा। इसके माध्यम से श्रावक-श्राविकाएं चातुर्मासिक अनुभव व पूज्य गुरूदेव के प्रति मन के भावों को अभिव्यक्त कर सकेंगेे।