- सैलाना वालों की हवेली, मोहन टॉकीज में “चातुर्मास पूर्ण विराम या अल्पविराम” विषय पर हुए विशेष प्रवचन
- 27 नवंबर को चातुर्मास परिवर्तन एवं श्री शत्रुंजय तीर्थ की भाव यात्रा का होगा आयोजन
रतलाम, 26 नवंबर। प्रभु, धर्म आराधना के माध्यम से हमें जगाने का प्रयास करते हैं। समझ ही ऐसी चीज है जो हमें जगाती है। हमें उठना है या जागना है, यह हम पर निर्भर होता है। आज हमारे पास समय तो है, लेकिन समझ नहीं है। उठने के लिए दो आंख काफी है लेकिन जागने के लिए चार आंख चाहिए।
यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में रविवार को सैलाना वालों की हवेली, मोहन टॉकीज में “चातुर्मास पूर्ण विराम या अल्पविराम” विषय के विशेष प्रवचन में कही। आचार्य श्री ने कहा कि धर्म के पथ पर चलने वाले धर्मियों को कभी सुलाना नहीं चाहिए और पापियों को जागना नहीं चाहिए, क्योंकि जब तक पापी सोए रहेंगे, तब तक शांति बनी रहेगी।
आचार्य श्री ने चार प्रकार की आंख- प्रेम की आंख, श्रद्धा की आंख, कृतध्नता की आंख और अनुभव की आंख को परिभाषित करते हुए कहा कि सामने वाला इंसान कितना भी पूजनीय हो, हमारे मन में उसके प्रति प्रेम होना चाहिए। यदि किसी ने गलती की और हम उसे माफ करने के लिए तैयार हैं तो बस यही प्रेम है। माफ करने वाला हमेशा बड़ा होता है।
आचार्य श्री ने कहा कि विश्वास कम या ज्यादा हो सकता है लेकिन श्रद्धा हमेशा अटूट रहती है। श्रद्धा की आंख से चातुर्मास का अल्पविराम होगा, पूर्ण विराम नहीं। उपकारी के उपकार को नहीं मानने वाला कृतध्न कहलाता है। क्रोध में रिश्ते बिगड़ते हैं, यह अनुभव है। संसार के अनुभव को देखकर हमें संयम के मार्ग पर चलना चाहिए।
27 नवंबर को चातुर्मास परिवर्तन
27 नवंबर को जैन कॉलोनी में चातुर्मास परिवर्तन एवं श्री शत्रुंजय तीर्थ की भाव यात्रा का आयोजन होगा। प्रातः 6.30 बजे आचार्य श्री गाजे – बाजे के साथ सेठजी का बाजार से चातुर्मास परिवर्तन हेतु प्रस्थान करेंगे। इसके पश्चात प्रातः 7 बजे जैन कालोनी में श्री शत्रुंजय तीर्थ की भाव यात्रा का आयोजन होगा। लाभार्थी श्री जैन कॉलोनी श्री संघ रहेगा। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी ने धर्मालुजनों से इस अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पधारने का आव्हान किया है।