गुरूवर ना जाओ यहीं कहती है धड़कन, तुम छोड़ कर जाओंगे हम सबको रूलाओंगे

  • आदिनाथ सोसायटी स्थानक प्रांगण में श्रावक-श्राविकाओं ने जताए मन के भाव
  • चातुर्मासिक पक्खी पर समकितमुनिजी के सानिध्य में मनाया गया कृतज्ञता दिवस

पूना, 26 नवम्बर। प्रतिदिन गुरूदेव के मुखारबिंद से जिनवाणी श्रवण करने वाले श्रावक-श्राविकाओं के मन में भावनाओं का सागर उमड़ रहा था,कोई उसे गीतों के माध्यम से तो कोई विचारों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास कर रहा था। कई ऐसे भी थे जिनके मन में गुरूदेव की विदाई के क्षण नजदीक आने से भावनाएं तो उथल-पुथल मचा रही थी लेकिन उन भावनाओं को शब्द नहीं दे पा रहे थे। ऐसे श्रावक-श्राविकाओं के चेहरे ही उनके भाव व्यक्त कर रहे थे। विदाई के क्षणों में भाव यहीं थे कि गुरूदेव आप यहां से विहार करने पर हमे भूल मत जाना ओर सदा अपने दिल में हमे रखना। किसी ने गुरूवर ना जाओ कहती यह धड़कन तुम छोड़ कर जाओंगे हम सबको रूलाओंगे, किसी ने गुरू मात पिता, गुरू बंधा सखा तो किसी ने गुरूवर तो ज्ञान के सागर है इनसे ही जन्नत है जैसे गीतों के माध्यम से अपने दिल की बात को शब्द प्रदान किए। ये नजारा रविवार को पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. के सानिध्य में चातुर्मासिक पक्खी पर दो दिवसीय कृतज्ञता दिवस के पहले दिन सामने आया। विचार अभिव्यक्त करने वालों ने चातुर्मास में गुरूदेव की जिनवाणी श्रवण कर क्या सीखा ओर उनके जीवन में क्या बदलाव आए इस बारे में भी बताने का प्रयास किया। विहार ग्रुप के सदस्य वैभव संघवी, संतोष पटवा, निलेश कोठारी, राहुल ललवाणी, अनिल लुणावत ने भावपूर्ण समूह प्रस्तुति देते गुरूदेव के प्रति मन के जज्बात जाहिर किए। विचार व्यक्त करने वालों में सुधीर मुथा, विजय पारख, मनोज कोचेटा, प्राची अभिनंदन लुंकड़, चंचल मासी कोठारी, चन्द्रकांत दरड़ा, साधना संतोष ललवाणी, पदमा बांठिया, विजय नवलखा, सुरेखा विजय लुणावत, संतोष भंसाली, कमल मासी लुंकड़, जयश्री बसंत पारख, सुनीता कुवाड़, सूरज मासी बंब, घेवरचंद झुंबरलाल जैन, डॉ. सतीश जैन, सुरेखा कांतिलाल सुराणा,रमेश बाघमार, ज्योति विजय नवलखा,पोपटलाल खाब्या, प्रवीण चौरड़िया आदि शामिल थे। सूरत से पधारे गुरू भक्त सुश्रावक गजेन्द्र चण्डालिया ने पूज्य समकितमुनिजी से हैदराबाद के लिए विहार के दौरान सूरत क्षेत्र में पधारने की भावपूर्ण विनती प्रस्तुत की। पूज्य समकितमुनिजी ने श्रावक-श्राविकाओं के मनोरथ अभिव्यक्ति का दौर पूर्ण होने पर कहा कि चातुर्मास शुरू होने के साथ ही समापन होना भी तय होता है। जहां मिलन के साथ बिछुड़ना है वहीं धर्म हो सकता है। जहां बिछुड़ना नहीं है वहां धर्म नहीं हो सकता है। उन्होंने सभी के प्रति हार्दिक मंगलभावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि पांच माह आदिनाथ संघ में बड़े सातापूर्वक शांतिपूर्ण माहौल में चातुर्मास हुआ। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना विजयमुनिजी म.सा., गायनकुशल जयवंत मुनिजी म.सा., सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। संचालन आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। समारोह में पूना एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे।
चातुर्मास स्मारिका ‘‘मैं समकित यात्री हूं’’ का विमोचन
कृतज्ञता दिवस समारोह में पांच माह के चातुर्मास में हुए विभिन्न यादगार आयोजनों को लेकर तैयार स्मारिका ‘मैं समकित यात्री हूं-पूना चातुर्मास 2023’ का विमोचन कर इसे पूज्य समकितमुनिजी म.सा. आदि ठाणा के श्रीचरणों में समर्पित किया गया। स्मारिका का विमोचन आदिनाथ संघ के अध्यक्ष श्री सचिन रमेशचन्द्र टांटिया सहित ट्रस्ट मण्डल के ट्र्िरस्टयों, पूर्व अध्यक्षों एवं प्रमुख श्रावकगणों ने किया। इस स्मारिका में पूना में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश से लेकर पांच माह में चातुर्मास के दौरान हुए जप, तप व साधना आधारित विभिन्न कार्यक्रमों की संक्षिप्त में जानकारी दी गई है। चातुर्मास में अठाई या उससे बड़ी तपस्या करने वालों की जानकारी भी मय फोटो शामिल की गई। चातुर्मास के दौरान पूज्य गुरूदेव के प्रवचनों के प्रमुख अंश भी इसमें शामिल किए गए है। इस स्मारिका का सम्पादन समकित की यात्रा के मीडिया समन्वयक निलेश कांठेड़ ने किया है।
नवकार मंत्र जाप कर सुरंग में फंसे श्रमिकों के लिए प्रार्थना
धर्मसभा में समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि उत्तर काशी में सुरंग निर्माण के दौरान मलबा गिर जाने से 41 श्रमिक गत 12 नवम्बर से सुरंग में फंसे हुए है। उनको निकालने के प्रयास जारी है लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। उन श्रमिकों तक रोशनी व ऑक्सीजन भी नहीं पहुंच पा रही है। उन्होंने फंसे हुए श्रमिक की कुशलता व जल्द बाहर निकालने में सफलता मिले इस मंगलकामना से 9 बार नवकार महामंत्र का जाप कराया। मुनिश्री ने कहा कि आराध्य गुरूदेव राजर्षि भीष्म पितामह सुमतिप्रकाशजी म.सा. के साता बनी रहे एवं स्वास्थ्य में सुधार की कामना से सभी श्रावक-श्राविकाएं घर पर कम से कम 27 बार नवकार महामंत्र का जाप अवश्य करें।
वीर लोकाशाह जयंति कल मनाई जाएगी
पूज्य समकितमुनिजी म.सा. के गतिमान चातुर्मास का अंतिम प्रवचन सोमवार को वीर लोकाशाह जयंति पर पर होगा। दो दिवसीय कृतज्ञता दिवस के तहत दूसरे दिन भी श्रावक-श्राविकाएं जप-तप व भक्ति का नया इतिहास बनाने वाले इस चातुर्मास को लेकर मन के भाव भी व्यक्त करेंगे। चातुर्मास समापन पूज्य गुरूदेव मंगलवार को आदिनाथ स्थानक भवन से विहार करेंगे।