चाह, राह बना देती है विषय पर तेजा नगर में हुए विशेष प्रवचन


रतलाम, 30 नवंबर। आज के दौर में होठ का उपयोग ज्यादा होता है और कान का कम, यही बात हर घर में विवाद का कारण बन रही है। गुरू की बात शिष्य, पति की बात पत्नी और सास की बात बहु सुनने को तैयार नहीं है। सुनने वाले तो हजारों है लेकिन स्वीकार करने वाले कम है, जो सुन सकता है, वह अपने आप को संभाल सकता है।
यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने गुरूवार को तेजा नगर स्थित समीर भाई तलेरा के निवास स्थान, जैन मंदिर के पास ” चाह, राह बना देती है ” विषय पर आयोजित एक दिवसीय विशेष प्रवचन में कही। उन्होने कहा कि भौतिक जीवन में जिस प्रकार से आहार जरूरी है, ठीक उसी तरह से आध्यात्मिक जीवन में प्रवचन जरुरी है। हमारी भूमिका भगवान से जुड़ने की होना चाहिए। यदि मन में प्रभु से मिलने की चाह होगी, तो राह अपने आप बन जाएगी।
आचार्य श्री ने कहा कि संबंध कभी तेल और पानी जैसे नहीं, दूध और पानी जैसी भूमिका के होना चाहिए। प्रभु से हमारा संबंध आत्मीयता का होना चाहिए। प्रभु के नीयर जाकर उनके वचनों को सुनकर उनके डियर बन सकेंगे। प्रभु सिर्फ अच्छे लगने से नही, अपने लगने से काम बनेगा। प्रभु के लिए हमारे मन में नियर, हियर, डियर, फीयर और टीयर की भूमिका होना चाहिए।
आचार्य श्री की निश्रा में हुए विशेष प्रवचन में लाभार्थी मोहनबाई सोभागमलजी तलेरा परिवार रहा। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं के उपस्थित रहे।
चार दिवसीय विशेष प्रवचन श्रेणी
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में मुमुक्षु निखिल कुमार के दीक्षा अवसर पर मोहन टॉकीज में 1 से 4 दिसंबर तक चार दिवसीय प्रवचन श्रेणी ” शरण मेरा रजोहरण ” विषय पर होगी। प्रवचन मोहन टॉकीज में प्रातः 9.15 से 10.15 बजे तक होंगे। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्री संघ, गुजराती उपाश्रय श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेतांबर पेढ़ी, रतलाम द्वारा धर्मालुजनों से अधिक से अधिक संख्या में पधारने का आव्हान किया है।