मानवता ही महानता की प्राप्ति का द्वार – आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी म.सा.

पगारिया हाऊस में प्रवचन का आयोजन

रतलाम 2 दिसम्बर 2023। घर-घर में मानव जन्म लेते है, मगर मानवता हर घर में जन्म नहीं लेती। जिस घर में या घट में मानवता जन्म लेती है, वह घर और घट धन्य हो जाता है। मानवता का संकट सबसे बड़ा संकट होता है। इस संकट का सामना आज हर वर्ग और हर समाज को करना पड़ रहा है। मानवता ही महानता की प्राप्ति का द्वार है। बिना मानवता को पाए, महानता को नहीं पाया जा सकता है।
यह बात पगारिया हाऊस में आयोजित धर्मसभा में शांत क्रांति संघ के आचार्यश्री विजयराजजी म.सा. ने कही। आपने कहा कि मानवता के निकट होने के तीन सूत्र संवेदनशीलता, नम्रता और उदारता है। ये तीन सूत्र जिसके जीवन में होते है, वह मानवता के निकट होता है। मानव ही अपने जीवन में मानवता प्राप्त कर सकता है। मानवता की अपेक्षा आज की नहीं, हर युग की और हर देश, समाज और राष्ट्र की होती है। मानवता की पूजा होनी चाहिए। जब मानव मानवता धारी बन जाता है, जो उसमें दूसरों के दुःखांे के प्रति संवेदनशीलता पैदा हो जाती है। संवेदनशील मानव नम्र और उदार बनकर हर दुःखी मानव की जरूरत को पूरा करने में अपना तन, मन, धन लगा देता है, जो उसे महानता की प्रतिष्ठा प्रदान करती है।
आचार्यश्री ने कहा कि सभी धर्म और सभी धर्म गुरू मानवता का संदेश देते है, इसीलिए आज थोड़ी बहुत मानवता बची हुई है। मानवता का दीप जब तक जलता रहेगा, तब तक सृष्टि सुरक्षित रहेगी। उपाध्याय प्रवर श्री जितेन्द्रमुनिजी म.सा. ने कहा कि मौत के साथ जिसकी दोस्ती होती है, वही धर्म को कल पर छोड़ता है। धर्म कल के लिए नहीं, वह आज के लिए और अभी के लिए होता है। प्रमाद में जीने वाले ही धर्म करने में बहाने बनाते है। आचार्यश्री के प्रवचन रविवार को भी पगारिया हाऊस में होंगे। प्रवचन की स्वीकृति देने पर स्टेशन रोड, जैन संघ में हर्ष की लहर छा गई।