गुरु कमल कुटिया का उद्घाटन किया गया





इंदौर (अहिंसा पर्वत) । प्रकृति महापुरुषों से भी बढ़कर है क्योंकि इसके सहयोग के बिना महापुरुष भी साधन की कल्पना भी नहीं कर। सकते उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने गुरु कमल कुटिया के उद्घाटन समारोह पर संबोधित करते कहा कि प्रकृति हमारे असली प्राण है इसकी सुरक्षा धर्म की रक्षा करने के समान है ।
उन्होंने कहा कि इंसान स्वार्थ और विलासिता में डूब कर प्रकृति पर कहर बरपाते हुए अपने पांव पर अपने हाथों कुल्हाड़ी मारने जैसा काम कर रहा है । मुनि कमलेश ने बताया कि प्रकृति की गोद अपने आप में स्वास्थ्य के लिए औषधि है साधना के लिए ऑक्सीजन से महत्वपूर्ण है। राष्ट्रसंत ने कहा कि धर्माचार्य को मिलकर अपनी उपासना पद्धति में प्रकृति की रक्षा को ध्यान में रखकर विकसित करना चाहिए ।
जैन संत ने कहा कि प्रकृति का कोई विकल्प नहीं है हीरे पानी माणक मोती से भी अनमोल है । घनश्याम मुनि कौशल मुनि ने मंगलाचरण किया तथा अक्षत मुनि ने विचार व्यक्त किया ।अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली के राष्ट्रीय संरक्षक अशोक जी मेहता की ओर से समारोह का आयोजन किया गया एडिशनल एसपी प्रमोद सोनकर ने कहा कि जैन संत पदयात्रा कर प्रकृति रक्षा का संदेश देते हैं वन संरक्षक अधिकारी धीरेंद्र जी ने कहा कि गिफ्ट और प्रसाद के रूप में पौधे देने चाहिए डॉक्टर वनिता कोठारी ने स्पष्ट कहा कि प्रकृति के बीच रहने पर पांचो तत्वों का संतुलन बराबर हो जाता है वह बीमारी से मुक्त हो जाता है। दिवाकर मंच शाखा इंदौर के परिचय सम्मेलन में मंच राजस्थान शाखा की प्रमुख सरपंच अर्चना जैन ने विद्यालय और गौशाला निर्माण का संकल्प लिया । केंद्रीय जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने कहा कि जेल बनने वाली गौशाला देश का मॉडल होगी ।
अहिंसा पर्वत पर राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश घनश्याम मुनि जी, कौशल मुनि जी, अक्षत मुनि जी आदि संत मंडल पधारे । इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्रीमती अलका सोनकर, डीजीपी प्रमोद सोनकर, सहायक वन संरक्षक धीरेंद्र सिंह एवं वरिष्ठ समाजसेवी कांतिलाल बम, दिलीप राजपाल, महेंद्र दुबे प्रकाश भटेवरा, रमेश भंडारी, सुमती कुमार ललवानी, श्रीमती त्रिशला जैन, सौरभ जैन, डाॅ वनिता कोठारी, डॉ प्रज्ञा जैन एवं अनेक गणमान्य उपस्थित थे। इस अवसर पर गुरु कमल कुटिया का उद्घाटन किया गया एवं अशोक मेहता ने मंदिर के मॉडल पर मंदिर के स्वरूप और मंदिर की विशेषता बतलाई। आप सभी अहिंसा पर्वत की लोकेशन देखकर गदगद हुए और बहुत तारीफ की। इस अवसर पर प्रकाश भटेवरा ने आभार व्यक्त किया।