सकारात्मक चिंतन से साधक सदैव प्रसन्नता में रमण करते है – आचार्य श्री विजयराज जी म. सा.

खाचरौद । हर प्राणी को प्रकृति प्रदत्त कई सुख प्राप्त है पर फिर भी मानव जीवन के दुःखों को बार-बार गिनकर नकरात्मकता पुष्ट करता रहता है। धर्मात्मा साधक यह जानते है कि सुख-दुःख की स्थिति स्वयं के कर्मों का फल है। इसी सकारात्मक चिंतन से साधक सदैव प्रसन्नता में रमण करते है। ये बात खाचरौद स्थित महावीर भवन जैन स्थानक में विराजित जैन शांत-क्रांति संघ के आचार्य श्री विजयराज जी म. सा. ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। आचार्य श्री के सानिध्य में प्रतिदिन प्रातः प्रवचन, दोपहर में लोगस्स जाप मांगलिक एवं ज्ञान चर्चा आदि गतिविधियों में बड़ी संख्या में धर्मालुजन शामिल हो रहे है। समाज के हर्षित चौरड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य श्री ने अपने शिष्य मंडल सहित रतलाम नगर में यशस्वी वर्षावास संपन्न कर पैदल विहार करते हुए शनिवार को खाचरौद नगर में प्रवेश किया है। प्रवेश चल समारोह में स्थानकवासी जैन संघ के सचिव महेंद्र चंडालिया, पारस सिसौदिया, सुधीर बुपक्या, निलेश मंडोत, धर्मेंद्र छाजेड़, मितेश भटेवरा आदि समाजजन उपस्थित थे।