
रतलाम। श्रमण संघीय, जैन दिवाकरीय, उप-प्रवर्तक परम पूज्य गुरुदेव डॉ. सुभाषमुनि जी म. सा. देवलोक गमन पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक रतलाम द्वारा पूज्य गुरुदेव को भाव श्रद्धासुमन अर्पित करने हेतु गुणानुवाद सभा का आयोजन नीमचौक स्थानक पर परम पूज्य आचार्य श्री कुलबोधी जी म.सा. की निश्रा में रखा गया।
इस अवसर पर संघरत्न इंदरमल जी जैन ने गुरुदेव को श्रद्धासुमन व्यक्त करते हुए धर्मसभा को बताया की दिवाकर परम्परा के प्रथम साधु थे जिन्होने P. Hd. की डिग्री हासिल की। 53 वर्षों का उत्कृष्ट संयम जीवन जीया।
संघ सलाहकार महेंद्र बोथरा ने गुरुदेव के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा की दिवाकर जी के प्रति आपकी अनन्य श्रद्धा थी आप रतलाम में पूज्य गुरुदेव मोहनमुनि जी मसा, प्रदीप मुनि जी मसा की सेवा में काफी समय तक रहे। अर्जुन सेवक ने लगातार 40 वर्षों तक आपकी खूब सेवा करी।
नवयुवक मंडल की और से अभय गाँधी ने श्रद्धासुमन व्यक्त किये। आचार्य श्री कुलबोधी मसा ने फरमाया की देव और धर्म के बीच गुरु सेतु का कार्य करता है। देव हमारे सम्मुख नही है लेकिन हमें देव और धर्म से जोड़ने वाले संत ही होते है। जैसे मिट्टी और रेती नदी से थोड़ा पानी लेती है और बादल को देती है तब बादल कई गुना पानी वापस नदी को धरती को देता है वैसे ही संत केवल रोटी कपड़ा और ठहरने के लिये स्थानक उपाश्रय लेते है उसके बदले में हम पर जिनवाणी की वर्षा करके अनन्त गुणा उपकार करते है । पूज्य गुरुदेव ने डाक्टर सुभाषमुनि के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
अंत में संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रेमकुमार जैन मोगरा ने 4 लोगस्स का पाठ किया एवं आचार्य श्री कुलबोधी जी मसा ने माँगलिक श्रवण करवाई। धर्मसभा का संचालन महामन्त्री विनोद बाफना ने किया। इस अवसर पर संघ के महेंद्र चानोदिया, विजय पटवा, मिट्ठूलाल खमेसरा, अजय खमेसरा, नवीन श्रीश्रीमाल, महेंद्र छाजेड़, सुरेश बोहरा, मनीष भटेवरा, पारस मेहता, पीयूष श्रीश्रीमाल, महेंद्र खमेसरा, राज गांधी, पंकज पटवा, ज्योति पटवा आदि बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।