रतलाम। भारत के उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश व्हाय.व्ही. चंद्रचूड़ ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय दिये। इन निर्णयों में 17 दिसंबर 1982 को प्रख्यात डी.एस. नाकारा प्रकरण में दिया गया निर्णय सदैव स्मरण रहेगा। इस निर्णय ने केन्द्र व राज्य सरकारों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशनाधिकार को सशक्त एवं सुरक्षित किया है। पेंशन सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों का अधिकार है। उसी दिन 17 दिसंबर से भारत के समस्त सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी व पेंशनर्स संगठनों द्वारा प्रतिवर्ष यादगार स्वरुप पेंशनर अधिकार दिवस मनाते है। प्रोग्र्रेसिव पेंशनर्स एसोसिएशन म.प्र. रतलाम अध्यक्ष कीर्तिकुमार शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष एम.एल. भïट्ट, सचिव एम.एल. नगावत, प्रवक्ता प्रमोद व्होरा, कोषाध्यक्ष प्रेम बेनावत, उपाध्यक्ष मो. अनवर, सतीश दय्या, गीता राठौर, डी.के. हाड़ा, जितेन्द्रसिंह भूरिया, हरिश कुमार बिंदल, जयवंत गुप्ते, आशा श्रीवास्तव, आर.आर. चव्हाण, रवि शंकर भार्गव, दिनेश जोशी, टी.आर. डोडियार, पी.डी. वैष्णव, गजेन्द्रसिंह राठौर, महेशचंद्र राठौर, ओमप्रकाश टांक, कल्लु खां, के.एल. भाटी, उमेश यति, डी.डी. गोठवाल, सी.एल. गौतम आदि ने पेंशन दिवस कार्यक्रम में रतलाम प्रेस क्लब पर 11 बजे उपस्थित होने की अपील की है।