
नई दिल्ली । भारत सरकार द्वारा परम पावन पूज्य आचार्य श्री सुशील कुमार जी महाराज की सुशिष्या साध्वी दीप्ति जी एवं साध्वी लक्षिता जी के सानिध्य एवं पू. स्वामी चिंदानंदजी सरस्वती परमार्थ निकेतन ऋषिकेश, साहेब सिंह ज्ञानी रंजीत सिंह मुख्य ग्रंथी गुरूद्वारा बंगला साहिब, पू. साध्वी भगवतीजी सरस्वती परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के आशीर्वाचन तथा श्री देवूसिंह चौहान राज्य संचार मंत्री, डॉ. हर्षवर्धन पूर्व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री, श्री कार्तिकेय शर्मा सासंद राज्सभा, श्री कपिल खन्ना अध्यक्ष दिल्ली प्रदेश विश्व हिन्दू परिषद, श्री पवन कुमार (पूर्व जज) अध्यक्ष हरियाणा प्रांत विश्व हिन्दू परिषद के मुख्य आतिथ्य तथा श्रीमती कविता जैन पूर्व मंत्री हरियाणा सरकार, श्री राजीव जैन पूर्व सलाहकार मुख्यमंत्री हरियाणा, श्री सतीश जैन वरिष्ठ उपप्रधान नगर पालिका, चौ. सुरेन्द्र खत्री प्रधान राष्ट्रीय अध्यक्ष लव वंशीय खत्री खाप, श्री संदीप मारवाह शिक्षक तथा पत्रकार, श्री विजय शेखावत नेता भाजपा, श्री रविन्द्र गुप्ता पूर्व महापौर दिल्ली, श्री सुरेन्द्रसिंह राणा ए.सी.पी. दिल्ली पुलिस के विशिष्ट आतिथ्य में आचार्य श्री के स्मरण डाक टिकिट का अनावरण आज दिं. 24 दिसम्बर 2023 रविवार को प्रात: 11 बजे आचार्य सुशील आश्रम, सी-599 डिफेंस कॉलोनी, नई दिल्ली में किया गया है । निवेदक विश्व अहिंसा संघ, विश्व अहिंसा संघ ट्रस्ट नई दिल्ली ने आयोजन को सफल बनाने की अपील की है ।
परम आचार्य सुशाील कुमार जी महाराज द्वारा ग्लोबल विजन 2000 वाशिंगटन डी.सी. सन् 1993 में दिए गए उदबोधन के कुछ अंश
आने वाले वर्षो में आप अनिर्णय की या भ्रम और संदेह की अवस्था में नहीं जी सकते । आपको दो टूक निर्णय करना होगा । हम किसी के विरूद्ध नहीं जा रहे है । हिन्दू का अर्थ यह नहीं होता कि वह किसी दूसरे को सहन नहीं कर सके । हिन्दु राष्ट्र का अर्थ यह है कि जहां न केवल सब मनुष्य बल्कि मनुष्य के अलावा और जितने भी प्राणी व पशु-पक्षी है,सारा जीव-जगत है सभी शांति और आनंद पूर्वक जी सके….जिस जाति ने भगवान महावीर को पैदा किया, जिसे संस्कृति ने भगवान बुद्ध को जन्म दिया और करूणा का संदेश दिया, जहां तीर्थकरों की पंरपरा सदा से अहिंसा का संदेश देती आई, जहां बुद्ध और बौधि सत्व सदा संसार के कल्याण के लिए लगे रहे, जहां भगवान राम सबको कत्र्तव्य का उदबोधन देते रहे, जहां भगवान कृष्ण ने गीता का अमर संदेश दिया और जहां हमारे गुरू, हमारे आचार्य, हमारे ऋषि इसको संभालते आए,उस देश, उस संस्कृति और परंपरा को हम कैसे बचा सकते है ? उसको हम कैसे चला सकते है ? आगे आने पीढिय़ों और परंपराओं को कैसे सुशिक्षित कर सकते है ? यही हमारे सामने मुख्य प्रश्न है ।
यहा सवाल अकेले जीने का नहीं है । अपनी संस्कृति और पंरपरा के अनुसार गौरवमय जीवन जीने का है । उसके अनुसार अगर जीना है तो यदि हमारी संस्कृति ही नहीं बच पाई तो हम कहां से बच पाएंगे । हिन्दू है तो हिन्दु सभ्यता है, हिन्दु संस्कृति और यदि हिन्दु ही नहीं है, हिन्दु राष्ट्र ही नहीं है, हिन्दु देश ही नहीं है, हिन्दु जाति ही नहीं है, तो हम शेष$ क्या बचा पाएगे ? और हमारे पास बचने/बचाने को रह ही क्या जाएगा ।
अगर आपको यही पहचान करनी है कि कौन हिन्दु है तो जहां ऊँ का गान होता है वह हिन्दु है । जहां मृत शरीर को जलाया जाता है वह हिन्दु । जहां अग्नि की साक्षी से संस्कार होते है चाहे वह जन्म हो या मृत्यु, विवाह हो या नामकरण, वह हिन्दु है । चाहे गंगा हो या गायत्री मंत्र या णमोकार मंत्र, जहां इनकी मान्यता है इनका पाठ और गायन होता है वह हिन्दु है जहा मंत्र का जिक्र होता है और जहां शब्द की बात कही जाती है वह हिन्दु है ।