क्या तुम रक्त दान नहीं कर सकते

गीतकार -अजय शर्मा
सौजन्य और आग्रहकर्ता -मध्यप्रदेश विप्र रक्त संगठन।।

क्या तुम रक्त दान नहीं कर सकते
मिला है सब इस माटी से ही,
क्यों इसका मान नहीं कर सकते,
क्या तुम रक्त दान नहीं कर सकते?
यह झरने यह शीतल पवने,
सूरज की किरणे मस्त- मस्त,-२
यह पर्वत और यह लता- पता,
सागर के तीरे व्यस्त- व्यस्त,- २
होकर अधीर जब यह सब भी,
ओरो का हित कर सकते हैं
क्या तुम रक्त दान नहीं कर सकते??
मिला है सब इस माटी से ही,
क्यों इसका मान नहीं कर सकते,
क्या तुम रक्त दान नहीं कर सकते?
दे दो थोड़ा रक्त मुझे भी,
इतिहास अगर तुम पीते हो।२
देदो थोड़ा रक्त मुझे भी,
पर हित गर तुम जीते हो!!२
जो देते हैं रक्त दान वह तो सचमुच वीर ही होंगे,
जनसेवा की खातिर दिल से वे गंभीर ही होंगे।
अपने ही क्यू निज मानवता के भी,(२)
क्या गहरे जख्मों को सीते हो?
दे दो थोड़ा रक्त मुझे भी गर पर हित को तुम जीते हो।।
बन गई जिंदगी एकटक,
बहनों बूढ़े और नन्हे- मुन्नों की,
देख जरा कल- कल करती,
कितनी नदिया तेरे खुनो की,(२)
जिसमे ईश्वर की इच्छा है,
यह शायद तेरी परीक्षा है,
विप्र रक्त संगठन कि बात मान,
आ दे दे तू भी रक्त दान।।२।।