ज्योति कोठारी, जयपुर
22 जनवरी, 2024 अयोध्या मे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम है. सम्पूर्ण हिन्दू समाज उन्हें भगवान के रूप मे पूजा करता है.
न धर्म के अनुसार इस अवसर्पिणि काल मे प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव श्री ऋषभदेव का जन्म अयोध्या नगरी मे ही हुआ था. उनके ज्येष्ठ पुत्र भरत इस क्षेत्र के प्रथम चक्रवर्ती बने, उनकी राजधानी भी अयोध्या ही थी.
श्री ऋषभदेव के बाद द्वितीय तीर्थंकर श्री अजित नाथ, चतुर्थ श्री अभिनंदन स्वामी, पंचम श्री सुमति नाथ एवं चतुर्दश श्री अनन्त नाथ का जन्म भी अयोध्या मे ही हुआ. तीर्थंकर अजित नाथ के पुत्र इस भूमि के द्वितीय चक्रवर्ती श्री सगर का जन्म भी अयोध्या मे ही हुआ. यह सभी वर्णन त्रिषष्ठी शलाका पुरुष चरित्र मे उपलब्ध है.
श्री राम 63 शलाका पुरुषों मे से एक हैं. कलिकाल सर्वज्ञ श्री हेमचंद्र आचार्य ने त्रिषष्ठी शलाका पुरुष चरित्र (10 वीं शताब्दी) मे श्री राम का वर्णन करते हुये लिखा है कि उन्होंने दीक्षा लेकर केवलज्ञान प्राप्त कर मोक्ष गमन किया. इसी प्रकार का वर्णन पउम चरियं, चऊपन्न महापुरुष चरियं आदि ग्रंथों मे भी पाया जाता है. इस प्रकार जैन दर्शन के अनुसार श्री राम सिद्ध परमेष्ठी रूप सर्वोच्च पद पर विराजित हैं.
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी को दिवाली जैसा मनाने का अनुरोध किया है और पूरा देश एक नई ऊर्जा के साथ दीपावली मनाने के लिये तैयार है.
सभी से निवेदन है कि जैन धर्म एवं राष्ट्रधर्म दोनों की अनुपालना करते हुए अपने घरों, कार्यालयों, एवं जिनालयों को दीपमालिका से सुसज्जित करें.