दादा गुरुदेव तप-जप ज्ञान साधना के स्वामी थे – मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी

गुरु सप्तमी पर्व एवं प्रथम गुरु मंदिर ध्वजा का आयोजन धूमधाम से हुआ

विट्ठलवाड़ी आकुर्डी (पुणे) । परोपकार सम्राट मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरणादाता आचार्य भगवंत श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के आज्ञानुवर्ति शिष्य परम पूज्य प्रवचनदक्ष मुनिप्रवर श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.आदि ठाणा की पावन निश्रा में विश्व वंदनीय कलिकाल कल्पतरु प्रातः स्मरणीय जन-जन की आस्था के केंद्र दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी म. सा.का गुरु सप्तमी पर्व एवं गुरु मंदिर की प्रथम ध्वजा वर्षगांठ समारोह उल्लास पूर्वक धूमधाम से मनाया गया। प्रातः स्नात्र पूजन एवं सत्तर भेदी पूजन किया। गुरु सप्तमी समारोह के संपूर्ण लाभार्थी श्रीमान प्रकाशजी हस्तीमलजी पारेख परिवार के गृह निवास से वरघोड़ा निकाला गया। बहुत सुंदर रथ पर दादा गुरु की विराट तस्वीर पुष्पहार से सुशोभित होकर सभी को मोहित कर रही थी। भक्ति बैंड गुरु गीत की धुम मचा रहा था। युवाओं का जोश महिलाओं की ड्रेस कोड में एक जैसी भक्ति आकर्षित कर रही थी। वरघोडा मुख्य मार्ग से होता हुआ संभावनाथ जिनालय पहुंचा वहां सर्वप्रथम दादा गुरुदेव राजेंद्र सुरिजी की प्रथम वर्षगांठ ध्वजा मुनिप्रवर के मंत्रोच्चार के साथ प्रकाशजी पारेख परिवार द्वारा चढाई गई। पश्चात सकल संघ की नवकारसी (नास्ता ) की गई। ठीक 11:00 बजे गुरु गुणानुवाद सभा का प्रारंभ हुआ। श्री रजतचंद्र विजयजी ने मंगलाचार कर धर्मसभा का प्रारंभ किया। दादा गुरुदेव राजेंद्र सुरिजी म.सा.आज विश्व में महान क्यों है, विश्व पूजनीय क्यों है,गुरु की इतनी महिमा पूरे भारतवर्ष में क्यों है इन सब पहलू पर विशिष्ट प्रभावशाली वक्तव्य दिया। राजस्थान कि शोर्य भूमि भरतपुर में गुरु का जन्म उदयपुर में गुरु की दीक्षा और आहोर में गुरु की आचार्य पदवी जावरा में गुरु ने क्रियोद्धार किया था राजगढ़ में गुरुदेव का देवलोक गमन एवं मोहनखेड़ा तीर्थ में समाधि मंदिर बना। इस तरह की जीवन यात्रा का प्रभावशाली प्रकाशन मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी ने किया व आगे कहां दादा गुरुदेव तप-जप ज्ञान साधना के स्वामी थे। संघ एकता हेतु दिव्य महापुरुष थे। इस तरह बहुत सुंदर गुरु की महिमा का वर्णन प्रभावी ढंग से मुनिश्री ने किया।धर्मसभा में सुरि ऋषभ द्वारा प्रेरित एवं 32 वर्ष से प्रकाशित गुरु सप्तमी पर्व पंचांग का विमोचन लाभार्थी एवं ट्रस्ट मंडल ने किया। पश्चात वार्षिक चढ़ावे बोले गए। जिसमें विभिन्न लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रातः एवं संध्या की 108 दीपक से गुरु महाआरती का लाभ आयोजन के संपूर्ण लाभार्थी प्रकाशजी पारेख परिवार ने लिया।
दोपहर मे श्री राजेंद्र सूरि गुरुपद पूजन का आयोजन किया गया। अहमदाबाद से आए संगीतकार आशीष जैन ने भक्ति की धूम मचाई। सुवासरा मध्य प्रदेश से पधारे विधिकारक बंटी जैन ने विधि कराईं । रात्रि में सुरि राजेंद्र की एक शाम गुरु के नाम भक्ति का आयोजन किया गया। रात्रि आरती का चढ़ावा संपूर्ण लाभार्थी परिवार प्रकाशजी पारेख ने विशिष्ट बोली बोलकर लिया जो विट्ठलवाली में रिकॉर्ड रहा। महिला मंडल व युवा ग्रुप सभी ने बहुत जोरदार सेवा भक्ति की। श्री संभावनाथ जैन संघ ने गुरु सप्तमी लाभार्थी परिवार वार्षिक बोली के लाभार्थी परिवार का बहुमान किया। इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष श्रीमान रंजीतजी सोलंकी का बहुमान भी किया । इस तरह से 17 जनवरी का दिन ऐतिहासिक यादगार भक्तिमय बना।