- बीड़ में पूज्य समकित मुनिजी म.सा. के दर्शन व प्रवचन श्रवण के लिए उमड़ रहे श्रावक-श्राविकाएं
- होली चातुर्मास के तहत पांच दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन मनाया दया दिवस

बीड़। भविष्य में क्या होगा हम नहीं जानते, जो बीत चुका उसका भी कुछ नहीं हो सकता बस वर्तमान हमारे हाथ में है इसलिए जितना हो सके जी लो। हमेशा सर्तक रहो अन्यथा एक गलती जिंदगी भर रूला सकती है ओर कभी-कभी तो एक गलती जन्मो-जन्म तक रूलाती है। ये विचार महाराष्ट्र के बीड़ शहर की पावन धरा पर होली चातुर्मास के लिए पहुंचे समकित के संग समकित की यात्रा के प्रणेता श्रमण संघीय वरिष्ठ सलाहकार राजर्षि पूज्य सुमतिप्रकाशजी म.सा. के ़सुशिष्य आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि डॉ.समकितमुनिजी म.सा. ने गुरूवार को श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ बीड़ के तत्वावधान में आयोजित होली चातुर्मास के तहत धर्मसभा में नौ दिवसीय प्रवचनमाला ‘‘कहानी द्रोपदी की,कहानी कर्म की’’ के आठवें दिन नागश्री ब्राह्मणी के प्रसंग की चर्चा करते हुए व्यक्त किए। होली चातुर्मास के पांच दिवसीय विशेष आयोजन के तहत गुरूवार को सामायिक दिवस मनाया गया। धर्मसभा में समकितमुनिजी ने बताया कि किस तरह नागश्री ब्राह्मणी द्वारा घर गोचरी के लिए आए मासखमण के तपस्वी संत धर्मरूचि अणगार को कचरा पात्र समझ जहरीली कड़वी सब्जी बेहराने की ऐसी गलती की जाती है जो उसे जन्मो-जन्म तक रूलाती है। नागश्री की भावना शुद्ध मंगल होती तो वह कर्म निर्जरा के इस अनमोल अवसर को कभी इस तरह नहीं गंवाती। हम अपनी गलती ओर परेशानी संत के गले में डालने का प्रयास करेंगे तो उसका कई भवों यानि जन्मो-जन्म तक चुकाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारी जिंदगी के दिन-रात व्यतीत होते जा रहे है। इनमें से जो समय धर्म में व्यतीत हो रहा है वह सफल है ओर जो अधर्म में व्यतीत हो रहा वह व्यर्थ चला जा रहा है। तुंग्या नगरी के श्रावकों से प्रेरणा लेनी चाहिए जो अपनी उम्र ही उतनी ही बताते थे जितना समय धर्म में व्यतीत किया हो। उत्तराध्ययन सूत्र में परमात्मा वीर प्रभु ने फरमाया भी है कि हमारा ओदारिक शरीर इतना दुर्बल है कि एक छोटा सा मच्छर भी परेशान कर जाता है। कुछ वर्ष पहले कोरोनाकाल में हम इसका प्रकोप भी देख चुके है। इसलिए शरीर से मोह छोड़ आत्मा में रमण करना सीखे तो जीवन जीने का लक्ष्य प्राप्त कर पाएंगे।
संत गोचरी के लिए आए तो चेहरे पर हो प्रसन्नता के भाव
पूज्य समकितमुनिजी ने धर्मसभा में ये भी समझाने का प्रयास किया कि कोई भी संत-साध्वी आहार-पानी (गोचरी) लेने हमारे निवास पर पधारे तो इसे अहोभाग्य मानते हुए हमारा व्यवहार, आचरण ओर भाव कैसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत गोचरी के लिए घर आए तो भोजन में जैसा है वैसा ही बताए कभी झूठ नहीं बोले। घर के आंगन में संत को देख चेहरे पर खुशी के भाव होने चाहिए। संत को गोचरी बेहराते समय ओर वार्तालाप करते समय विवेक रखना चाहिए। धर्मसभा में गायन कुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने प्ररेणादायी गीत प्रस्तुत किया। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा.का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में बीड़ व आसपास के विभिन्न स्थानों से आए श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। कई श्रावक श्राविकाओं ने एकासन, आयबिंल, उपवास के प्रत्याख्यान भी लिए।
11-11 सामायिक कर दया दिवस की आराधना
होली चातुर्मास के पांच दिवसीय आयोजन के तहत पहले दिन बुधवार को पैसाठिया छंद की आराधना की गई। इसके दूसरे दिन गुरूवार को दया दिवस मनाया गया। इसके तहत कई श्रावक-श्राविकाओं ने 11-11 सामायिक कर दया धर्म की आराधना की। दया करने वाले बच्चों का श्रीसंघ द्वारा सम्मान भी किया गया। होली चातुर्मास के तहत 23 व 24 मार्च को सामूहिक बेला तप की आराधना होगी। बेले तप का सामूहिक पारणा 25 मार्च को जैन भवन में होगा। पूना के आदिनाथ भवन में पिछला एतिहासिक चातुर्मास सम्पन्न करने के बाद आगामी हैदराबाद चातुर्मास के लिए विहार यात्रा के तहत बीड़ पहुंचे प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी, प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी एवं गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. आदि ठाणा के प्रवचन श्रवण व मुनि दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उमड़ रहे है।