

रतलाम, 22 मार्च। मनुष्य जीवन में हम हर चीज पर अपना हक जताते हैं, लेकिन जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि इस भव में जो संपत्ति कमाई है, वह आने वाले भव में हमारे किसी काम नहीं आने वाली है। यह सब जानने के बाद भी हम ” मैं और मेरा ” की बात करते हैं, लेकिन कभी यह नहीं सोचा कि मेरे मरने के बाद आगे क्या होगा।
यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने ” मृत्यु से मुलाकात ” विषय पर प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि हम अपने बेटे-बेटी, परिवार की सोचते हैं कि मेरे मरने के बाद इनका क्या होगा। मृत्यु के समय मनुष्य का सबसे बड़ा दुख यह होता है कि उसने जो पाया है, वह सब छोड़कर उसे जाना है।
आचार्य श्री ने कहा कि हम कभी यह नहीं सोचते कि ” मैं कब जाने वाला हूं, मैं कहां जाने वाला हूं, मैं किसके साथ जाने वाला हूं और मुझे कैसे जाना है। ” मनुष्य जब जाता है तो वह अपना शरीर, संपत्ति, सामग्री, संयोग सब कुछ छोड़ कर जाता है। प्रभु ने मानव भव दिया है तो हम कुछ ऐसा करके जाए, जिसे दुनिया याद करें।
” कैसे करें मन के दोषों को दूर ” विषय पर होंगे शनिवार को प्रवचन
आचार्य श्री निश्रा में शनिवार को मोहन टॉकीज में ” कैसे करें मन के दोषों को दूर ” विषय पर प्रवचन होंगे। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ, गुजराती उपाश्रय श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वे. पेढी, रतलाम द्वारा आयोजित प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थिति रहे।