सती प्रथा से भी ज्यादा विधवा प्रथा खतरनाक है – राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश

अहमदनगर आनंद धाम। पति के देवलोक गमन पर पत्नी के साथ जैसा दुर्व्यवहार किया जाता है तो पत्नी के देव लोग गमन पर पति के साथ क्यों नहीं। उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने संबोधित करते कहा कि नारी और पुरुष के लिए एक ही घटना के लिए अलग-अलग व्यवहार क्यों किया जाता है यह अन्याय और पाप है।
उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म ग्रंथ में भेदभाव का उल्लेख नहीं किया गया है भेदभाव अभिशाप है सभी को सामान प्यार और सम्मान मिलना चाहिए। मुनि कमलेश ने बताया कि पति के देवलोक गमन पर वह मातृशक्ति मजदूरी झाड़ू पोछा और भी कार्य करके संघर्ष करके बच्चों का पालन करती है उपेक्षा के अपमान की परवाह न करते हुए मैदान में रहती है वह किसी वीरांगना से काम नहीं है।
राष्ट्रसंत ने कहा कि सती प्रथा से भी विधवा प्रथा अनंत गुना ज्यादा खतरनाक है सती प्रथा में एक बार जला देते परंतु विधवा प्रथा में पल-पल तिरस्कार के हथियार से जीवित को भी करने जैसे जीने को मजबूर करते हैं।
जैन संत ने बताया कि अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली की ओर राष्ट्रव्यापी वीरांगनाथन सम्मान समारोह के अंतर्गत 29 मार्च को प्रातः 9:00 बजे अहमदनगर आनंद धाम महाराष्ट्र प्रवर्तक श्री कुंदन ऋषि जी प्रबुद्ध चिंतक श्री आदर्श ऋषि जी सहित 50 साधु साध्वी के सानिध्य में करीब 1000 वीरांगनाओं का अभिनंदन समारोह आयोजित किया जा रहा है। दिवाकर मंच महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मंगला भंडारी नासिक मार्गदर्शन प्रदान करेगीजिसमें उनको सरकारी सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी और जैन समाज मंगल काम में वीरांगना को प्रोत्साहित करेगी तथा उनका अपशुकन नहीं मानने का संकल्प लेगी। मंच की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कल्पना मुथा पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सरोज सुराणा ने मुनि कमलेश विस्तार से चर्चा की।