औलीजी आराधना अन्तर्गत वंदे प्रभुवरं पुस्तक का भव्य विमोचन समारोह किया गया

दहाणु। श्री मोहनखेड़ा गुरुधाम तीर्थ दहाणु में शास्वती श्री नवपद औलीजी आराधना अन्तर्गत प्रथम दिवस परोपकार सम्राट मोहनखेड़ा महातीर्थ विकास प्रेरक आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के आज्ञानुवर्ति शिष्य पंचम वर्षीतप तपस्वी वरिष्ठ मुनिप्रवर श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा की निश्रा में प्रवचनदक्ष मुनिप्रवर श्री रजतचंद्र विजयजी म.साहेब द्वारा रचित पुस्तक वंदे प्रभुवरं का भव्यतम विमोचन श्रीमान हस्तीमलजी नथमलजी सर्राफ भिवंडी मुंबई के हाथों किया गया।
इस मौके पर नवपद औलीजी आराधना लाभार्थी श्री मगराजजी पुनमिया श्री मुकेशजी बाठिया महिदपुर सिटी M.P. रमेशजी जैन बागरा व मदनजी भंडारी बागरा मुम्बई श्रीमती लिनाबेन अनीताबेन नागोत्रा सोलंकी तलेगांव दाभाड़े राखीबेन खापोली आदि ने भी विमोचन किया।
आराधना के ठीक 1 दिन पहले बंधु बेलडी़ गुरु भगवंतों का तीर्थ पावन भूमि पर भव्यातिभव्य वाजते गाजते साजन महाजन के साथ मंगल प्रवेश किया गया। साथ में नीति सूरीश्वरजी समुदाय के साध्वी जी इन्दुयशा श्री जी आदि ठाणा पांच भी उपस्थित थे मुंबई से मगराज जी पुनमिया 150 आराधको को लेकर पधारे। अन्य क्षेत्रीय आराधक भी इसमें जुड़े। करिब 200 आयंबिल प्रतिदिन हो रहे हैं। प्रातः 05:00 बजे प्रतिक्रमण, प्रातः 6:30 बजे से भक्तमर गुरु चालीसा का पाठ पश्चात नवपद महिमा प्रवचन धारा क्रिया एवं पूजा अनुष्ठान रात्रि प्रतिक्रमण देव-गुरु आंगी दर्शन एवं भक्ति भावना आदि समस्त यशस्वी इतिहास सर्जक आयोजन हो रहे है। 9पदजी के सार गर्भित तात्विक प्रवचन गंगा में नित्य श्रद्धालु श्रावक श्राविका गण स्नान कर अपने आप को पावन बना रहे हैं। प्रतिदिन संगीतकार द्वारा संगीतमय स्नात्र पूजन हो रही हैं भक्ति भावना के आयोजन हो रहे हैं। इस तीर्थ भूमि पर पहली बार नवपद औलीजी आराधना का भव्य अनुष्ठान किया जा रहा है। पूरी राल पट्टी में सर्वप्रथम यह नवपद औलीजी आराधना की धूम मची हुई है। प्रतिदिन मुंबई और सूरत के गुरुभक्त दर्शन करने पधार रहे हैं।