- दीक्षा अंगीकार करने के बाद दोनों नवदीक्षितों के चेहरे खिल उठे
- दीक्षा में उमड़ा श्रावक श्राविकाओं का जन सैलाब


रतलाम। आचार्य श्री उमेशमुनिजी के सुशिष्य प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी ने शुक्रवार 3 मई को अपार जनसमुदाय की उपस्थिति में छोटू भई की बगीची पर सीमा दिनेश पटवा की सुपुत्री 25 वर्षीय युवा मुमुक्षु कृति पटवा को जैन भगवती दीक्षा का पाठ पढाया। वही इंदौर के मुमुक्षु संजीव जैन ने भी दीक्षा अंगीकार की। दीक्षा अंगीकार करने के बाद दोनों नवदीक्षितोंं के चेहरे खिल उठे। इनके चेहरे की रौनक देखते ही बनती थी। दीक्षा ग्रहण करवाने के बाद नवदीक्षित संजीव जैन का श्री संजीवमुनिजी व नवदीक्षिता कृति पटवा का साध्वी भक्ति्श्रीजी नामकरण की घोषणा की गई। संजीवमुनिजी प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी के शिष्य बने। वहीं साध्वी भक्तिश्रीजी साध्वी पुण्यशीलाजी की शिष्या बनी। इस तरह दीक्षा महोत्सव का सभी ने पूरा पूरा लाभ लिया।
मुमुक्षुओं के जयकारों से पांडाल गुंजायमान हो गया
आयोजित दीक्षा महोत्सव का प्रारंभ प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी ने मंगलाचरण से किया। इसके पश्चात् प्रवर्तक श्री ने दीक्षा विधि प्रारंभ करने के पूर्व अखिल भारतीय श्री धर्मदासगण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनीत वागरेचा, श्री धर्मदास जैन श्री संघ के अध्यक्ष रजनीकांत झामर व दोनों दीक्षार्थियों के स्वजनों से औपचारिक आज्ञा लेकर दीक्षा विधि प्रारंभ की। इसके पूर्व दोनों मुमुक्षु महाभिनिष्क्रमण यात्रा के साथ परिवारजन एवं जनसमुदाय के साथ दीक्षा महोत्सव स्थल पहुंचे। इस समय समूचा पांडाल जयकारों से गूंज उठा। यहां अणुवत्सश्री संयतमुनिजी, तत्वज्ञ धर्मेंद्रमुनिजी व रत्नपुरी गौरव गिरीशमुनिजी ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। साध्वी प्रशमप्रभाजी , शमप्रभाजी, चतुर्गुणाजी, सौम्याजी व पूर्णताजी आदि ने स्तवन प्रस्तुत किया। सारंगपुर से आए नन्हे बालक ने अपने विचारों से पूरी सभा को गदगद कर दिया।
63 संयमी आत्माओं का मिला पावन सानिध्य
दीक्षा प्रसंग पर धर्मदास गणनायक प्रवर्तक जिनेंद्रमुनिजी, अणुवत्स संयतमुनिजी, संघहित चिंतक धर्मेंद्रमुनिजी, रोचकवक्ता संदीपमुनिजी आदि ठाणा 20 एवं साध्वी मधुबालाजी, मुक्तिप्रभाजी, प्रेमलताजी, संयमप्रभाजी, पुण्यशीलाजी आदि ठाणा 43 सहित कुल 63 चारित्र आत्माओं का पावन सानिध्य मिला।
सांसारिक जीवन का अंतिम उद्बोधन देकर सामूहिक क्षमायाचना की
दीक्षा के पूर्व दोनों मुमुक्षु संजीव जैन व मुमुक्षु कृति पटवा ने अपने सांसारिक जीवन का अंतिम उद्बोधन दिया व हाथ जोड़कर सभी से सामूहिक क्षमायाचना की। समारोह में श्री धर्मदास जैन श्री संघ के अध्यक्ष रजनीकांत झामर, केतन जैन, रेणुका जैन, मुमुक्षु संजीव जैन की बहने, वर्षा चौपड़ा, हर्षा गांधी आदि ने अपने विचार रखे। संचालन अणु मित्र मण्डल के वरिष्ठ मार्गदर्शक राजेश कोठारी ने किया।
बड़ी दीक्षा 9 मई को बदनावर में होगी
श्रीसंघ के महामंत्री विनय लोढा ने बताया कि 28 अप्रैल को दीक्षित हुए श्रेयांशमुनिजी एवं दोनों नवदीक्षित संजीवमुनिजी व साध्वी भक्तिश्रीजी की बड़ी दीक्षा 9 मई को बदनावर में होगी।
13 दिन में 5 दीक्षा
अणु मित्र मंडल के अध्यक्ष नवदीप मूणत ने बताया कि प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी के मुखारविंद से रतलाम शहर में 13 दिनों में 5 मुमुक्षु आत्माओं ने जैन भगवती दीक्षा ग्रहण की है। जिसमें 21 अप्रैल को मुमुक्षु राजमल नलवाया व श्रुति मुणत, 28 अप्रैल को मुमुक्षु श्रेयांस चौरड़िया तथा 3 मई को मुमुक्षु कृति पटवा व मुमुक्षु संजीव जैन ने जैन भगवती दीक्षा अंगीकार की।