मीठी वाणी और सौम्य व्यवहार सबसे बड़ा और सरल वशीकरण मंत्र है – मालव गौरव पूज्यश्री प्रियदर्शनाजी म.सा.

रतलाम 07 अगस्त। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक रतलाम पर अयोजित धर्मसभा में जिनशासन चंद्रिका, मालव गौरव पूज्यश्री प्रियदर्शनाजी म.सा. (बेरछावाले) एवं तत्वचिंतक पूज्यश्री कल्पदर्शनजी म.सा. ने कहा कि मीठी वाणी और सौम्य व्यवहार सबसे बड़ा और सरल वशीकरण मंत्र है। हम भूख लगने से पहले भोजन की व्यवस्था करते हैं, प्यास लगने से पहले पानी की व्यवस्था करते हैं, यहां तक ​​कि जवानी में बुढ़ापे की भी व्यवस्था करते हैं, लेकिन वही व्यक्ति बुद्धिमान है जो मरने से पहले अपने अगले जीवन की व्यवस्था कर लेता है।
जन्म के साथ मृत्यु निश्चित है, कोई अमरचंद नहीं है, इसलिए वही व्यक्ति बुद्धिमान है जो मरने से पहले धर्म, आत्मा और अध्यात्म की कमाई करके अपने अगले जीवन को दुर्भाग्य से बचाता है।
स्वभाव के अनुसार 4 प्रकार के मनुष्य बताए गए हैं, पहला लोहे के समान: ऐसे मनुष्य के जीवन का कोई मूल्य नहीं होता, वह अपना पूरा जीवन क्रोध, मान, माया, लोभ और काम में बिता देता है, उसका धर्म से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं होता।
दूसरा चांदी के समान: ऐसे व्यक्तियों का जीवन चांदी के समान सफेद, निर्मल और उज्ज्वल होता है, वे धर्म के मार्ग पर चलते हैं और स्वयं का कल्याण करते हैं।
तीसरा सोने के समान: ये और भी उच्च भावना वाले होते हैं जो न केवल स्वयं धर्म के मार्ग पर चलते हैं बल्कि दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। चौथे हीरे के समान: इसमें संत, सती और स्वाध्यायी शामिल हैं। जो स्वयं और दूसरों के कल्याण के मार्ग पर चलते हैं और निकट भविष्य में मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं। वे संत जो महान होते हैं लेकिन किसी कारणवश दीक्षा नहीं ले पाते लेकिन स्वाध्यायी बन जाते हैं, वे भी महान हैं। क्योंकि कई क्षेत्र, शहर, गांव, बस्तियां हैं और वहां संत कम हैं, तो स्वाध्यायी खाली क्षेत्रों में सेवा करते हैं और जिनवाणी को लोगों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। अच्छा वक्ता होने के साथ-साथ अच्छा श्रोता होना भी बहुत जरूरी है। श्रोता के गुण: श्रोता को विनम्र और मृदुभाषी होना चाहिए। वाणी में विवेक का अभाव 11 पाप कर्मों का बंधन कराता है। कुल 18 पापों में से 11 पाप वाणी में विवेक के अभाव के कारण होते हैं। दूसरा पाप है मृषावाद: झूठ बोलना: यह पाप झूठ बोलकर वाणी का दुरुपयोग करने से होता है। बड़े पुण्य से प्राप्त यह वाणी अगली बार या तो प्राप्त नहीं होगी या अस्पष्ट होगी। जो व्यक्ति बोलने की कला सीख लेता है, वह सर्वत्र लोकप्रिय हो जाता है। वाणी में संयम रखने से शत्रु भी मित्र बन सकते हैं। बांसुरी की मधुर धुन से सांप जो एक जहरीला जीव है, उसे भी वश में किया जा सकता है। मधुर वाणी सबसे बड़ा वशीकरण मंत्र है। यदि कोई बड़ा हमें कुछ गलत भी कह दे, यदि हम उस समय शांत रहें, तो हमारा कर्म बंधन कट जाता है। जिसके पास भाषा में विवेक है, वह अपना जीवन सफल बना सकता है।

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