

रतलाम 07 अगस्त। सौ.वृ.त. श्री राजेंद्र सूरि त्रिस्तुतिक जैन श्वेतांबर श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा नीम वाला उपाश्रय खेरादी वास में रतलाम नंदन प. पू .श्री 1008 जैन मंदिर के प्रेरणादाता, राष्ट्र संत कोकण केसरी गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय लेखेन्द्र सुरिश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्ती एवं मालवमणि पूज्य साध्वी जी श्री स्वयं प्रभाश्री जी म.सा. की सुशिष्य रतलाम कुल दीपिका शासन ज्योति साध्वी जी श्री अनंत गुणा श्रीजी म.सा,श्री अक्षयगुणा श्रीजी म.सा. श्री समकित गुणा श्री जी म.सा. श्री भावित गुणा श्री जी म.सा. उपासना में विराजे हैं जिनका चातुर्मास में नित्य प्रवचन चल रहे हैं इसी तारतम्य में आज 7 अगस्त 2024,बुधवार को साध्वी श्री साध्वी श्री अनंत गुणा श्री जी मसा ने अपने मंगल प्रवचन में बताया कि जितना ज्यादा तपस्वी होगा उसको उतना ही गुस्सा आएगा और क्रोध से तपस्या निष्फल हो जाती है। इसलिए तपस्या करो परंतु शांत रहो।तप ताप नहीं बन जाए उसका ध्यान रखो जीवन में कोई प्रसंग बन जाए तो बैर नहीं रखना चाहिए।आप मिच्छामि दुक्कडम उसको करते हो जिससे प्रेम भाव रखते हैं। जिसके साथ में लड़ाई झगड़ा है उसे मिच्छामि दुक्कडम नहीं देते हैं तो उसका भी दोष, पाप लगता है क्रोध एक बार आता है और पूरा जीवन समाप्त हो जाता है।
घर के अंदर एक व्यक्ति चिल्लाएगा और दूसरा व्यक्ति जवाब नहीं देगा तो लड़ाई खत्म हो जाएगी पर दोनों एक जैसे बनेंगे तो तलाक तक बात पहुंच जाती है। दोनों में से कोई भी व्यक्ति मन मार लेता है तो तलाक की स्थिति नहीं बनती और अभी देखने में आया है तलाक करने में मां का बड़ा योगदान होता है।पहले के समय में सब लोग काम हाथ से करते थे अब सब काम मशीनों से हो गया है तो समय बहुत अधिक मिलता है इसमें सबसे पहला कारण फोन है। मां से फोन पर छोटी-छोटी बातें करते रहते हैं घर तोड़ने में मां, बहन और फ्रेंड का अहम रोल होता है अब तो तलाक की फैशन चल गई है अब जैन समाज में भी नातरा ज्यादा होने लग गया है।अब तो फैशन चल गई है की शादी का पूरा खर्चा लड़के वाले उठाएंगे और इसमें बाद तलाक का मुकदमा चलाएंगे साथ ही घर भी खाली कर जाते है जैसे अपने आप के घर से सब रुपए कोड़ी लाई हो और कोर्ट में पुलिस में प्रकरण चलता रहता है और लड़के वाले बोलते हैं हम कुछ भी नहीं कर सकते क्योंकि कानून महिलाओं के पक्ष में है।ज्ञानीजन कहते हैं क्रोध को कंट्रोल करना पड़ेगा। इसलिए आज आपको भी एक नियम लेना पड़ेगा की बेटियों का घर तोड़ना नहीं है,जोड़ना है आप अगर इनका घर तोड़ोगे तो अगले भव में कर्म बंधन में आएंगे मोक्ष में जाने वाले हो तो कर्म उदय हो जाए और आपका रास्ता रुक जाएगा।इसीलिए आप अपने जीवन में उत्कृष्ट भाव लाए केवल्य ज्ञान और केवल्य दर्शन के माध्यम से मोक्ष हो सकता है।क्योंकि कर्म कभीभी, किसी भी भव में उत्पन्न हो सकते हैं उक्त बात मे व्याख्यान में कहीं।
साध्वी श्री समकीत गुणा श्रीजी ने अपने उद्बोधन में कहां की परम करुणा के धारक विश्व उद्धारक जगत के मोक्ष का मार्ग दिखाने वाले भगवान महावीर स्वामी के ज्ञान को समझाते हुए विनय विजय जी मसा. ने कहां की जो समता से प्राप्त होता था वह कहीं से भी प्राप्त नहीं होता है।उसके लिए आपको स्वजनों के साथ ममत्व तोड़ना होगा और समता का भाव लाना होगा। परिवार वाले से, रिश्तेदारो से समभाव रखना पड़ेगा।स्वयं के लिए जैसे आप अच्छे भाव रखते हो वैसे ही दूसरों के प्रति भी अच्छे भाव रखने होंगे। जैसे पड़ोसी का लड़का बीमार हुआ और आपका लड़का बीमार हो गया तो एक भाव आना चाहिए।आप क्षमता रखोगे तो सामने वाला अपने आप सुधर जाएगा इसलिए प्रेम से बोलो अच्छे से बोलो क्षमता रखो जो सब काम आसानी से हो जाते हैं।जैसे आप व्यवहार मेहमानों के साथ प्रिय व्यवहार करते हो वैसा ही परिवार वालों के साथ करोगे तुम ममत्व टूटेगा। मसा. ने कहा कि शांत सुधा रस में यही बताया है की शांति पाना है तो शांत होना पड़ेगा।
कल के प्रवचन में आपके कर्म बंधन से कैसे मुक्ति पर व्याख्यान दिया जाएगा। सौ. वृ.त. त्रीस्तुतिक जैन श्री संघ एवं राज अनंत चातुर्मास समिति, रतलाम के तत्वाधान में बड़ी संख्या में श्रावक एवं श्राविकाए उपस्थित थी।