

रतलाम, 22 अगस्त। आचार्य देव श्री नयचंद्रसागर सुरीश्वर जी म.सा. ने गुरुवार को सैलाना वालों की हवेली मोहन टॉकीज में प्रवचन देते हुए आत्म कल्याण के तरीको पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसार में आत्मा के अलावा सभी चीज अनर्थकारी है। हमें अपने आत्म कल्याण के लिए प्रभु की आराधना करते हुए उनकी शरण में जाना होगा। आचार्य श्री ने कहा कि मंदिर में जाने से धर्म होता है। धर्म करने से बाहर की चीज मिलने के बाद भी मन की शुद्धि होती है। भले ही आप संसार का काम करते हो लेकिन आत्मा का ध्यान रखो और धर्म की और अग्रसर हो, धर्म लाभकारी है। धर्म से आत्मा का कल्याण होता है। हमारा जीवन में एक ही लक्ष्य मोक्ष का होना चाहिए। प्रवचन में गणिवर्य डॉ. अजीत चंद्र सागर जी म.सा. ने कहा कि हम कर्म करके आनंद लेते हैं लेकिन भगवान कहते हैं आराधना करते जाओ और आनंद की अनुभूति अपने आप होगी। लोग जब बाहर से घर में आते है तो नहाने से अच्छा महसूस करते है, ठीक ऐसे ही प्रभु की आराधना करने से मन और आत्मा हल्की होती है। कर्मों को क्षीण कर सब अपनी आत्मा को शुद्ध करो। इसी भाव को मन में रखकर प्रभु की आराधना करे। श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्री संघ गुजराती उपाश्रय रतलाम एवं श्री ऋषभदेव जी केसरीमल जी जैन श्वेतांबर पेढ़ी रतलाम द्वारा आयोजित प्रवचन श्रृंखला में बड़ी संख्या में श्रावक, श्राविकाए उपस्थित रहे।