जैनाचार्य श्रीपूज्य श्रीजी के पाट महोत्सव पर बीकानेर में दुर्लभ दिव्य धरोहर के होंगे दर्शन

8 फरवरी से तीन दिवसीय आयोजन, हजारों भक्त पहुंचेंगे बीकानेर

रतलाम (शिरीष सकलेचा)। जिनत्व के खरे शाश्वत स्वरुप को अखंड अक्षुण्ण बनाए रखने वाले सबसे प्राचीन खरतरगच्छ की श्रीपूज्य परंपरा के वर्तमान 40 वें गच्छाधिपति आचार्य सद् गुरुदेव श्रीपूज्य श्री जिनचंद्र सूरि जी महाराज साहब के गुरु गद्दी पाट पर विराजमान के 52 वें वर्ष पर अति विशिष्ट अद्भुत त्रिदिवसीय महोत्सव 8-9-10 फरवरी को बड़ा उपासरा बीकानेर में मनाया जाएगा। इस तीन दिवसीय आयोजन को लेकर श्री संघ द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही है। द्वितीय दिवस पाट उत्सव मनाया जाएगा।आयोजन समिति, श्री संघ द्वारा देश भर के श्री संघों को आमंत्रण पत्रिका दी जा रही है।हजारों हस्त लिखित ग्रंथों को देख सकेंगे…..बीकानेर के सुनील डागा, महिदपुर के अजय धाड़ीवाल बताते है कि श्रीपूज्य परंपरा वो गुरु परंपरा है जिसमें 4 दादा गुरुदेव जैसे सिद्ध पुरुषो ने अपनी साधना योग बल से अपने समय में ऐसी धर्म प्रभावना की कि उनसे प्रेरित हो लाखों नये लोगों ने सच्चे धर्म को अपनाया ।‌ पूरे भारत भर में एवं सुदूर विदेशो में भी जिनके लाखों भक्त है एवं हर गांव शहर में दादावाड़ीयां बनी हुई है। इन्हीं महा प्रभावक दादा गुरुदेव एवं श्रीपूज्य यति परंपरा के रचित हजारों हस्तलिखित ग्रंथों को बड़ा उपासरा रांगडी चौकबीकानेर(राजस्थान) में सहेज कर संरक्षित रखा गया है। इनके दर्शन का लाभ लेने का यह अनुपम अवसर हैं। यहां एक हजार ग्रंथों का दर्शन लाभ,श्री पूज्यों को प्रेषित विनती पत्रों का लाभ, 64 फिट अति प्राचीन विनती पत्रों का लाभ, 1100 वर्ष की श्री पूज्य परम्परा के पट्ट आदि का दर्शन लाभ भी मिलेगा। तृतीय दादा गुरुदेव श्री जिन कुशल सूरि जी के द्वारा सूरि मंत्र साधना का पट्ट , पुस्तक दर्शन एवं उनके द्वारा अभिमंत्रित वासक्षेप वर्तमान गुरुदेव से ग्रहण करने का भी यह अनोखा अवसर रहेगा ।500 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है बड़ा उपासरा….खरतरगच्छ की गुरु गद्दी जो प्रारंभ में पाटण में स्थापित हुई कालांतर में जिसको बड़ा उपासरा जैसलमेर में स्थापित किया गया। चतुर्थ दादा गुरुदेव श्री पूज्य श्री जिनचंद्र सूरि जी द्वारा जैसलमेर से गुरु गद्दी पाट के मूल पाये बीकानेर स्थानांतरित कर बड़ा उपासरा रांगडी चौक बीकानेर में गुरु गद्दी पाट एवं खरतरगच्छ केन्द्र प्रतिष्ठित किया गया। यह बड़ा उपासरा 500 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है एवं यह चतुर्थ दादा गुरुदेव की साधना स्थली है चतुर्थ दादा गुरुदेव ने बड़ा उपासरा में 11 बार चातुर्मास किये। सभी श्रीपूज्य जी ने यहां साधना भी की और जिन शासन सेवा के लिए अहर्निश योगदान दिया। श्री संघ में भीतर बाहर की समृद्धि बनी रहे सदा श्रीपूज्य गुरुदेवो द्वारा इस दिशा में जो अवदान है इन उपकारों को न भूलाया जा सकता है न उपकारों को भूलाना चाहिए। यह पाट महोत्सव भी सद् गुरु के प्रति भक्तों की कृतज्ञ श्रृद्धा भावनाओं की अभिव्यक्ति का उत्सव है। जिसमें साधक साधिका सहज स्फूर्त साधना सेवा को आत्मसात करने में अधिकाधिक समर्पण भावों को पुष्ट करने की ऊर्जा प्राप्त कर जीवन को सम्यक् दिशा में गतिमान करने को उद्धृत बनेंगे। श्री पूज्य जिन चंद्र सूरी जी की होगी निश्रा……सद् गुरुदेव जंगम युग प्रधान, वृहद् भट्टारक , 1008 श्रीपूज्य श्री जिनचंद्र सूरि जी महाराज साहब की महनीय निश्रा एवं भावी श्रीपूज्य यतिवर्य श्री अमृत सुंदर जी म.सा., यतिवर्य श्री सुमति सुंदर जी म.सा. , आर्या श्री मुक्ति प्रभा श्री जी , आर्या श्री समकित प्रभा श्री जी के पावन सानिध्य में त्रिदिवसीय महोत्सव में सत्य साधना ध्यान के प्रातः कालीन सत्र होंगे पश्चात् प्रतिदिन विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं आडियो विजुअल प्रोग्राम से धर्म, संस्कृति के अद्भुत दर्शन का लाभ जनमेदिनी को प्राप्त होगा। हर प्रांत से पहुंचेंगे भक्त….महोत्सव में देश के हरेक प्रांत से शहर गांवों से हजारों भक्तों का बीकानेर आगमन होने जा रहा है। युवा साधक साधिकाओ की कुशल सेवा टीम कई माह पहले से ही तैयारियां कर रही है। शिरीष सकलेचा ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन के बाद सत्य साधना शिविर भी होगा।