जावरा 7 साल बाद भी अधूरी पड़ी पीलियाखाल सौंदर्यीकरण योजना, 60% काम पर 90% भुगतान का आरोप

पूर्व नपा अध्यक्ष अनिल दसेड़ा ने उठाए गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

जावरा। शहर की बहुप्रतीक्षित पीलियाखाल सौंदर्यीकरण योजना एक बार फिर विवादों में आ गई है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनिल दसेड़ा ने योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री, प्रमुख सचिव, आयुक्त नगरीय प्रशासन, उज्जैन संभागायुक्त एवं रतलाम कलेक्टर को पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दसेड़ा ने अपने पत्र में बताया कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत जावरा शहर के मध्य बहने वाली पीलियाखाल को प्रदूषण मुक्त एवं विकसित करने के उद्देश्य से सौंदर्यीकरण योजना तैयार की गई थी। शहर की अधिकांश नालियों का गंदा पानी पीलियाखाल में मिलने से यह गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुकी थी, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। साथ ही आसपास के हैंडपंपों एवं ट्यूबवेलों के जल स्रोत भी प्रभावित हो रहे थे।
उन्होंने बताया कि कोटा की चंबल नदी और अहमदाबाद की साबरमती रिवरफ्रंट परियोजना की तर्ज पर बनाई गई इस योजना को मध्यप्रदेश शासन ने मुख्यमंत्री अधोसंरचना 2.0 योजना में शामिल करते हुए लगभग 8 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की थी। इसके बाद वर्ष 2019 में नगर पालिका द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी कर 8 करोड़ 68 लाख रुपये का कार्यादेश जारी किया गया था। टेंडर की शर्तों के अनुसार यह कार्य एक वर्ष में पूरा होना था।

7 वर्ष बाद भी अधूरा है प्रोजेक्ट
पूर्व नपा अध्यक्ष अनिल दसेड़ा ने 8 जून 2026 को पीलियाखाल क्षेत्र का निरीक्षण कर कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि रपट से लेकर सिटी श्मशान तक अंडरग्राउंड पाइपलाइन तो बिछाई गई, लेकिन शहर के गंदे नालों को अब तक उससे नहीं जोड़ा गया है। वहीं सिटी श्मशान के आगे प्रस्तावित फिल्टर प्लांट का केवल ढांचा तैयार हुआ है, जबकि शेष कार्य लगभग ठप पड़ा हुआ है।
दसेड़ा के अनुसार वर्तमान स्थिति में योजना का कुल कार्य लगभग 60 प्रतिशत ही पूरा हुआ है, जबकि नगर पालिका द्वारा ठेकेदार को 7 करोड़ 71 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल स्वीकृत राशि का लगभग 90 प्रतिशत है।

“काम कम, भुगतान ज्यादा” — दसेड़ा
अनिल दसेड़ा ने आरोप लगाया कि शासन के नियमों के अनुसार कार्य के सत्यापन और संतुष्टि के बाद ही भुगतान किया जाता है। यदि योजना का केवल 60 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है तो ठेकेदार को लगभग 90 प्रतिशत भुगतान कैसे कर दिया गया, यह गंभीर जांच का विषय है।
उन्होंने कहा कि कार्य की वास्तविक प्रगति की तुलना में अधिक भुगतान किए जाने से यह प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया है। उन्होंने मांग की कि योजना में हुए कार्य, भुगतान और तकनीकी स्वीकृतियों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

जनहित से जुड़ा है मामला
दसेड़ा ने कहा कि पीलियाखाल सौंदर्यीकरण योजना का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि शहर को प्रदूषण, गंदे पानी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत दिलाना था। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि योजना अधूरी है तो यह जनता के धन और जनहित दोनों के साथ गंभीर अन्याय है।

मुख्य बिंदु
वर्ष 2018 में बनी थी पीलियाखाल सौंदर्यीकरण योजना।
मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना के तहत 8 करोड़ रुपये स्वीकृत।
2019 में 8.68 करोड़ रुपये का टेंडर जारी।
एक वर्ष में कार्य पूर्ण होना था।
7 वर्ष बाद भी योजना अधूरी।
लगभग 60% कार्य पूर्ण होने का दावा।
ठेकेदार को 7.71 करोड़ रुपये भुगतान होने का आरोप।
पूर्व नपा अध्यक्ष ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा करोड़ों रुपये की इस परियोजना में कथित अनियमितताओं की जांच कब और कैसे होती है।

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