“मृत्यु अंत नहीं, किसी और के जीवन में उजाले की शुरुआत भी हो सकती है”

किसी प्रियजन के निधन का दुःख असहनीय होता है, लेकिन उसी क्षण लिया गया नेत्रदान का निर्णय किसी नेत्रहीन व्यक्ति के जीवन में नई सुबह ला सकता है। रतलाम में पिछले चार वर्षों से चल रहा नेत्रदान जनजागरण अभियान इसी मानवीय संवेदना का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।
नेत्रम संस्था, रेडक्रॉस सोसायटी रतलाम, सेवा भारती, काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन तथा अनेक सामाजिक, धार्मिक और सेवा संगठनों के संयुक्त प्रयासों से अब तक 575 से अधिक नेत्रदान संपन्न हो चुके हैं। इन नेत्रदानों के माध्यम से अनेक दृष्टिबाधित व्यक्तियों को पुनः देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
इस अभियान की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई, जब नेत्रम संस्था के संस्थापक हेमंत मूणत के पिता स्वर्गीय नेमीचंद मूणत के निधन के बाद परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लिया। यह प्रेरणा उन्हें अपने नानाजी सेठ समरथमल बोहरा बड़नगर वाला के लगभग 35 वर्ष पूर्व हुए नेत्रदान से मिली थी। परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय आगे चलकर समाज में जागरूकता का एक सशक्त आंदोलन बन गया।
सोशल मीडिया पर इस अनुभव को साझा करने के बाद अहमदाबाद की समाजसेविका सपना संघवी ने इस पहल को संगठित रूप देने की प्रेरणा दी। इसके बाद नवनीत मेहता, जिनकी माताजी का नेत्रदान हो चुका था, इस अभियान से जुड़े। वहीं मारवाड़ी महिला मंडल की सदस्यों के आमंत्रण पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों ने इस मुहिम को व्यापक जनसमर्थन दिलाया।
समय के साथ यह कारवां बढ़ता गया और अनेक ऐसे लोग इससे जुड़ते गए जिनके परिवार स्वयं नेत्रदान एवं देहदान जैसे महान कार्यों से जुड़े रहे हैं। इनमें ओमप्रकाश अग्रवाल, शीतल भंसाली, शलभ अग्रवाल, भगवान ढलवानी, गोविंद काकानी, गिरधारीलाल वर्धानी, प्रशांत व्यास, सुशील मीनू माथुर, सुरेश पाटीदार,आशीष काबरा, यशवंत पावेचा धर्मराज पाटीदार, राकेश पाटीदार कनेरी और राखी व्यास सहित अनेक समर्पित कार्यकर्ता शामिल हैं।
इनमें से कई परिवार समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। शीतल भंसाली के दादाजी एवं दादीजी, गोविंद काकानी के माताजी-पिताजी, गिरधारीलाल वर्धानी के पिताजी, सुशील मीनू माथुर के माताजी-पिताजी, यशवंत पावेचा के पिताजी तथा राखी व्यास के पिताजी ने नेत्रदान कर मानवता की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की। यशवंत पावेचा के पिताजी द्वारा नेत्रदान के साथ देहदान का संकल्प भी समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है।
महिला विंग की प्रमुख राखी व्यास के नेतृत्व में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को नई ऊर्जा प्रदान की है। आज संस्था के कार्यकर्ता केवल जागरूकता कार्यक्रम ही नहीं करते, बल्कि दुःख की घड़ी में परिवारों के बीच पहुंचकर अत्यंत संवेदनशीलता और सम्मान के साथ नेत्रदान का संदेश भी देते हैं।
इस अभियान की सफलता में नेत्रम संस्था, रेडक्रॉस सोसायटी रतलाम ,सेवा भारती,काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन
एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है। नेत्रदान की सूचना मिलने पर आवश्यक चिकित्सा समन्वय, आई बैंक से संपर्क, समयबद्ध व्यवस्थाएं तथा जनजागरण गतिविधियों में सभी संस्थाओं की टीम निरंतर सक्रिय रहती है। एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं का सहयोग भी इस अभियान को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है।
हेमंत मूणत का कहना है
“नेत्रदान किसी व्यक्ति का अंतिम दान नहीं, बल्कि किसी अन्य के जीवन में नई शुरुआत का माध्यम है। जब किसी परिवार की सहमति से नेत्रदान होता है और किसी नेत्रहीन को रोशनी मिलती है, तब लगता है कि दिवंगत व्यक्ति आज भी समाज की सेवा कर रहा है। हमारा प्रयास है कि नेत्रदान को लेकर समाज में किसी प्रकार की झिझक या भ्रांति न रहे और प्रत्येक परिवार इस विषय पर सकारात्मक चर्चा करे।”
हेमन्त मूणत, नेत्रम संस्था
रेडक्रॉस सोसायटी रतलाम के चेयरमैन प्रितेश गादिया का कहना है
“नेत्रदान मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है। रतलाम में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और जागरूक परिवारों के सहयोग से एक सकारात्मक वातावरण निर्मित हुआ है। प्रत्येक नेत्रदान दो लोगों के जीवन में प्रकाश ला सकता है। यदि समाज का प्रत्येक जागरूक नागरिक इस दिशा में आगे आए, तो हजारों लोगों के जीवन का अंधकार दूर किया जा सकता है।”
आज नेत्रदान के प्रति जागरूकता का स्तर पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ा है। अनेक वरिष्ठ नागरिक स्वयं आगे आकर मृत्यु उपरांत नेत्रदान की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं। यह बदलाव समाज में बढ़ती संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का प्रतीक है।
नेत्रदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी सर्वोच्च श्रद्धांजलि है। मृत्यु के बाद भी हमारी आंखें किसी की दुनिया रोशन कर सकती हैं। यही संदेश आज रतलाम से पूरे समाज तक पहुंच रहा है।
आइए संकल्प लें — जीवन के बाद भी जीवन को रोशन करेंगे।
“नेत्रदान महादान : आपकी आंखें, किसी की नई दुनिया।”